दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: दौर्मन्त्र्यान्नृपतिर्विनष्यति यतिः सङगात्सुतालालनात् विप्रोऽन्ध्ययनात्कुलं कुतनयाच्छीलं खलोपासनात् … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: रहिमन राज सराहिए ससिसम सुखद जो होय कहा वापुरी भानु है, तपैं तरैवन खोय कविवर रहीम कहते है की उसी राज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जसी परै सो सहि रहै, कहि रहीम यह देह धरती पर ही परत है, शीत घाम और मेह कविवर रहीम कहते हैं कि इस मानव … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: छोटेन सों साहैं बंड़े, कहि रहीम यह लेख सहसन का हय बांधियत, लै दमरी की मेख कविवर रहीम कहते हैं कि छोट … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछु न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देनदार कोउ और है, भेजत सा दिन रैन लोग भरम पै धरे, वाते नीचे नैन कविवर रहीम कहते हैं कि इस जीवन में क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह इस ब्लाग/पत्रिका की सौवीं पोस्ट है) सहकामी तू घट में करै, घट ही में करतार घट ही भीतर पाइये, सुर … more →