दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी ब्लाग जगत में नित नये अनुभव होते हैं। यह पता ही नहीं लगता कि कोई उसी बात पर नाराज हो रहा है जि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: भारत एक बृहद देश है और इसमें तमाम प्रकार के समुदाय और समाज के लोग रह्ते है और यह कोई नयी बात नही है। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: भक्त से पूछा गया ‘बता राम कौन है’ जो मनुष्यदेह धारण किये हो और पूछे ऐसा प्रश्न इस अहंकार … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सत्य से जितनी दूर जाओगे भ्रम को उतना ही करीब पाओगे खवाब भले ही हकीकत होने लगें सपने चाहे सामने चमकने … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर चंडूखाने से खबर यह आयी अंतर्जाल पर हिन्दी भाषा में गालीवाद का युग आ ग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्द के भूतपूर्व अध्यक्ष श्री आई। एस। बिंद्रा ने कपिल देव पर आई। सी। एल। को … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पहले ब्लागर का पता उसके मित्र ने ही दूसरे ब्लागर को दिया था और सख्त हिदायत थी कि किसी भी तरह उससे बह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पोता विदेश से गोरी मेम को ब्याह्कर घर लाया और अपनी दादी से मिलवाया बहु ने अपना मूँह बिचकाया और उसे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जंगल के राजा शेर को उसके खुफिया प्रमुख सियार भाया ने दी खबर ‘महाराज आपके खिलाफ पूरे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पोश कालोनी के उस घर में साँप निकला तो कोहराम मच गया वह ऐक कोने में पडा था अपने ही हाल से बेहाल था पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पुरानी धरोहर के विभाग में मची थी खलबली क्योंकि सर्वेसर्वा ने आजादी के दिन ऐक कार्यक्रम में कहा था ईम … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने ——– अब रात के अंधेरो से ज्यादा दिन की रौशनी में अपनों की अँधेरी नीयत से लोग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: कभी दुकान कभी मकान कोई भी हो नया निर्माण लोग कराते हवन जिंदगी से ऊबते हालातों से जूझते लोग मंत् … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: डाक्टर साहब ने रास्ते में स्कूटर रोककर कबाड़ी से कहा ‘तुम कालोनी में आते हो पर हमारे घर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: तुम अपने हृदय में घूमते हुए विचारों और मस्तिष्क में चिन्त्तन और मनन से उपजे शब्दों को लिखना कोई … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पैसा है तो पाने के लिये प्यार है पद है तो खाने के लिये पकवान है प्रतिष्ठा है तो पहचान है राजा हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: ऐसा लगता है कि हमने पाश्चात्य सभ्यता को अपनाया पर कुछ लेट हो गये और यही कारण है कि कहीं न तो स्वय … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: धन, पद और प्रतिष्ठा की शक्ति हो जाती है जिन पर मेहरबान क्यों न करे वह उस पर अभिमान इस जहां में सभी य … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वाह रे बाज़ार तेरा खेल मैदान में पिटे हीरो को कागज और फिल्म पर चमकाकर और सजाकर जनता के बीच देता है ठ … more →