Blogs about: Feb 2007
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ना रहा
ज़मीन भी जाती रही और आसमान भी ना रहा पर कटे परिंदे में उड़ने का अरमान भी ना रहा प… more »
इक शायर अंजाना सा...
ना रहा
— 1 comment
Rohit Jain wrote 1 month ago: ज़मीन भी जाती रही और आसमान भी ना रहा पर क … more »
वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा
Rohit Jain wrote 2 months ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जाय … more »
मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ
Rohit Jain wrote 2 months ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरि … more »
रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है
Rohit Jain wrote 2 months ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चल … more »
ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये
Rohit Jain wrote 2 months ago: ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये और कुछ … more »
पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है
Rohit Jain wrote 2 months ago: पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है वो … more »
