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Blogs about: Feb 2007

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ना रहा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़मीन भी जाती रही और आसमान भी ना रहा पर कटे परिंदे में उड़ने का अरमान भी ना रहा पहले तो अपने होने का व … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, ना

वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा

Rohit Jain wrote 1 year ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा वो इस ज़बाँ से उस ज़बाँ ये किस्सा ले जायेगा दुआ माँगी तो थी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, का

मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ रास्ते मुश्किल किये पास आ रहीं हैं दूरियाँ हर क़दम पर बिछ र … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, नहीं

रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है

Rohit Jain wrote 1 year ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चले गये तो सारा शहर खामोश है कैसा तन्हा है समाँ ताज़ीर-ए-खामोशी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, है

ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये

Rohit Jain wrote 1 year ago: ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये और कुछ नहीं कोई इन्तेज़ार मिल जाये ज़िंदगी साहिलों पर अटकी हुई है अब … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, को

पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है वो शख्स आज फिर मुझे क्यों याद आया है हर राह पर करता फ़िरा ये प्य … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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