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खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं
खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं, जितना थामूं उड़ जाते हैं इन रस्तों में कुछ गड़बड़ है, उ… more »
इक शायर अंजाना सा...
खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं
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Rohit Jain wrote 2 months ago: खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं, जितना थामूं … more »
ना रहा
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Rohit Jain wrote 3 months ago: ज़मीन भी जाती रही और आसमान भी ना रहा पर क … more »
दुख के चेहरे पर लकीरें याद की
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Rohit Jain wrote 4 months ago: दुख के चेहरे पर लकीरें याद की सुन रहा ह … more »
हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे
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Rohit Jain wrote 4 months ago: हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे बंद आँ … more »
सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं
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Rohit Jain wrote 4 months ago: सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं होता नही … more »
निगाहों के आसपास
Rohit Jain wrote 4 months ago: कुछ ख्वाब सजा रखे हैं निगाहों के आसपास … more »
बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं
Rohit Jain wrote 4 months ago: बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं ए … more »
ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ
Rohit Jain wrote 4 months ago: ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहर … more »
वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है
Rohit Jain wrote 4 months ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है ब … more »
वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा
Rohit Jain wrote 4 months ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जाय … more »
मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ
Rohit Jain wrote 4 months ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरि … more »
रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है
Rohit Jain wrote 4 months ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चल … more »
ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये
Rohit Jain wrote 4 months ago: ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये और कुछ … more »
पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है
Rohit Jain wrote 4 months ago: पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है वो … more »
