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खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं6 comments

Rohit Jain wrote 2 months ago: खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं, जितना थामूं … more »

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ना रहा1 comment

Rohit Jain wrote 3 months ago: ज़मीन भी जाती रही और आसमान भी ना रहा पर क … more »

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दुख के चेहरे पर लकीरें याद की5 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: दुख के चेहरे पर लकीरें याद की सुन रहा ह … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे1 comment

Rohit Jain wrote 4 months ago: हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे बंद आँ … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं1 comment

Rohit Jain wrote 4 months ago: सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं होता नही … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

निगाहों के आसपास

Rohit Jain wrote 4 months ago: कुछ ख्वाब सजा रखे हैं निगाहों के आसपास … more »

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Feb 2008, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं

Rohit Jain wrote 4 months ago: बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं ए … more »

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ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ

Rohit Jain wrote 4 months ago: ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहर … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है

Rohit Jain wrote 4 months ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है ब … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा

Rohit Jain wrote 4 months ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जाय … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ

Rohit Jain wrote 4 months ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरि … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है

Rohit Jain wrote 4 months ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चल … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये

Rohit Jain wrote 4 months ago: ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये और कुछ … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है

Rohit Jain wrote 4 months ago: पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है वो … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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