सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में अपनी भी दीवानगी कुछ कम नहीं मैं और वह, दोनों … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 5 months ago: सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में अपनी … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पल … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: आज महसूस किया मैंने गर तुम्हें किसी और … more →