वह पुराना अभिनेता अपने बैठक कक्ष में सिगरेट पर सिगरेट फूंकता हुआ इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था। उसने अपने सचिव से कहा-‘तुमने उस दो कौड़ी के निर्देशक को फोन किया कि नहीं?‘ सचिव ने कहा-‘कर दिया साहब! आता … more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकाSatish Chandra satyarthi wrote 8 months ago: मामूली खुशियों की दुनिया में लौटा लेने आई है श्याम बेनेगल की फिल्म वेलकम टू सज्जनपुर। हमारी ज़िंदग … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं … more →
Rakesh wrote 10 months ago: तुमको देखा तो यह ख़्याल आया की कल रात को मैंने इतना क्यों खाया तू मेरे दिल में ऐसे समाई है जैसे बाजरे … more →
Rakesh wrote 10 months ago: Why INDIA is in trouble….. ……… …….. ….. Population: … more →
Rakesh wrote 10 months ago: ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो ♥ ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो, भले छीन लो मुझसे USA का व … more →
Rakesh wrote 10 months ago: Always keep smiling and be happy.Life is too small to complain . ____________0000 ____________0____ … more →
अफ़लातून wrote 10 months ago: पाक जागृति ‘हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के , इस मुल्क़ … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच् … more →
Rakesh wrote 1 year ago: d ECIDE Hansa : Praful “Decide” matlab ? Praful : “Decide” Hansa … vo … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने कुछ अंग्रेजी ब्लाग के पाठों को हिंदी में अनुवाद कर उन्हें पढ़ा। इसमें कुछ भारतीय लेखकों द्वारा … more →
Rakesh wrote 1 year ago: जब भी हम पहली बार किसी से मिलते है तो क्या करते है, बहुत आसान है – जब भी हम किसी से पहली बार म … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: खुमारी चढ़ के उतर गई ज़िंदगी यूं ही गुजर गई – 2 कभी सोते सोते कभी जागते ख़्वाबों के पीछे यू ही … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे, जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा, जिनको इक उम्र कलेजे से … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा, ऐसा जलवा नही देखा, ऐसा चेहरा नही देखा, जब ये दामन की हवा ने, … more →
Rakesh wrote 1 year ago: यू चुप रहना ठीक नहीं कोई मीठी बात करो, मोर,चकोर,पपीहा,कोयल सबको मात करो.. सावन तो मन-बगिया से बिन … more →
Rakesh wrote 1 year ago: अभी शादी का पहला ही साल था, ख़ुशी के मारे बुरा हाल था! खुशियाँ कुछ यूँ उमड़ रही थीं, की संभाले नहीं … more →
Rakesh wrote 1 year ago: मदिरा पीने की अभिलाषा ही बन जाए जब हाला, अधरों की आतुरता में ही जब आभासित हो प्याला, बने ध्यान ही कर … more →
Rakesh wrote 1 year ago: मधुर भावनाओं की सुमधुर नित्य बनाता हूँ हाला, भरता हूँ इस मधु से अपने अंतर का प्यासा प्याला, उठा कल्प … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: कुछ दिनों से टीवी पर खूब फिल्में देखी जा रही हैं। हर शाम समाचार चैनलों या इंटरनेट पर समय बिताने के … more →