किसी का यूं तो हुआ कौन उम्रभर फिर भी ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी हज़ार बार ज़माना इधर से गुज़रा है नई नई सी है कुछ तेरी रहगुज़र फिर भी तेरी निगाह से बचने में उम्र गुज़री है उतर गया रग-ए-जां मे… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: किसी का यूं तो हुआ कौन उम्रभर फिर भी ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी हज़ार बार ज़माना इधर से … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं यूं ही कभू लब खोले हैं पहले “फ़िराक़” को देखा होता अब तो बहुत … more →