ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने को जी करता है खो गया हूँ तन्हाइयों में कहीं न कोई शाद है न दर्द है कहीं बिछायी-बिछायी काँटों की तह है… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’… नया जन्म हुआ है त … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →