Blogs about: Flower
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इश्क़ सुना है हमने बहुत
इश्क़ सुना है हमने बहुत ज़रा करके तो देखें मिल जाये कोई कमसिन हसीना उसपे मरके त… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
इश्क़ सुना है हमने बहुत
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विनय प्रजापति wrote 4 days ago: इश्क़ सुना है हमने बहुत ज़रा करके तो देख … more »
जब कभी मैंने साँस ली
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: जब कभी मैंने साँस ली साथ तेरे नाम की फा … more »
राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना … more »
शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: शाम है और मैं हूँ, तुम क्यों नहीं, क्यों … more »
तस्व्वुरे-हुस्नो-सादगिए-'शीना'
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिय … more »
आँखों में आँसू नहीं आते
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आँखों में आँसू नहीं आते क्योंकि मैं जा … more »
नग़मे खिलने लगे हैं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »
तन्हाई मिटाने दो
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई मिटाने दो किस्से सुनाने दो सुब … more »
पहली नज़र का पहला प्यार
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना म … more »
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ … more »
कभी तुम घर आओ ना
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हम … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
नींद गहरी है रात ठहरी है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नींद गहरी है रात ठहरी है आज ख़ाबों की ब … more »
बाँसुरी वाला वह नंद गोपाला
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: बाँसुरी वाला वह नंद गोपाला आया छोरा मो … more »
जो दिल से जाता नहीं है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो द … more »
एक मेरा सपना तू ही तो थी
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी … more »
काश वह कोई गुल होती
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: काश वह कोई गुल होती मैं उसे अपने लबों स … more »
you always got best of me
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: flowers knew how to bloom i always setout myself from the crowded rooms i spent all day and night in … more »
ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है जिस … more »
