विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते वह हमसे अय्यारी नहीं तो और क्या फ़रमाते हमारी क़िस्मत में जीते-जी फ़ना … more →
विनय wrote 1 year ago: नहीं कोई दोस्त मेरा न सही रक़ीबों से मिल के दिल हल्का करते हैं सैलाबे-क़लक़ चढ़ता जाता है पैमाने दर्द क … more →
विनय wrote 1 year ago: I am a jerk, I am a creep But what are you? You deceived me by knowing You are mean, you know Silly … more →