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Blogs about: Friednds

किस जमाने की माशुका हो-हिन्दी हास्य कविता (hindi poem on love)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago:  माशुका ने पूछा आशिक से ‘अगर शादी के बाद मैं मर गयी तो क्या मेरी याद में ताजमहल बनवाओगे।’ आशिक … more →

Tags: abhivyakti, aducation, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन

पहचान के लिए परेशान पूरा ज़माना-हिन्दी चिंतन और कविता (trouble of identity-hindi article and poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राकृतिक का नियम है परिवर्तन! दिन हुआ है तो रात भी होगी। सूरज उगा है तो जरूर डूबेगा। धूप है तो अंधे … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, आस्था, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप

जख्म और मरहम-व्यंग्य कविता (zakhma aur marham-vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago:  हमने कहा था ‘जख्म पर मरहम लगा दो’ उन्होंने नमक छिड़क दिया। पीड़ा से हम कराहते रहे उन्होंने कहा ‘ … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, सृजन, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi megazine

नोबल और ग्लोबल-व्यंग्य आलेख (noble and global-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा को शांति के लिये नोबल पुरस्कार मिलने पर स्वयं उनको ही बहुत बड़ा … more →

Tags: हिन्दी, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, अनुभूति, आलेख, हिंदी साहित्य

बुतों का बाजार-हास्य व्यंग्य कविता (buton ka bazar-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है … more →

Tags: writing, अभिव्यक्ति, bhaarat, भारत, shayree, Shayri, अनुभूति, media, Internet

आस्तिक, नास्तिक और स्वास्तिक- (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: सच बात तो यह है कि दुनियां विश्वास के आधार पर तीन भागों में बंटी हुई हैं-आस्तिक,नास्तिक और स्वास्तिक … more →

Tags: hindi, writing, हिन्दी, Global Dashboard, inglish, हिंदी, व्यंग्य चिंतन, yakeen, India

गंगा और यमुना नदियों की तरह होता है हिन्दी भाषा का दोहन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अंतर्जाल पर हिंदी में सक्रिय कई ऐसे ब्लाग लेखक हैं जिन्हें लिखते हुए छह साल हो गये हैं। उन लोगों की … more →

Tags: writing, inglish, दीपक द्वारा, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, Internet, Urdu, arebic

हिन्दी ब्लॉग दे सकते हैं प्रचार माध्यमों को चुनौती-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: उस दिन चिट्ठकार चर्चा का नियमित ईमेल पढ़ा-यह ईमेल इसके सदस्यों को नियमित भेजा जाता है-जिसमें तमिल बच … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, संपादकीय, हिंदी, दीपक द्वारा, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन

इजरायल और चीन से सीखने लायक क्या है-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: पता नहीं क्यों भारत के लेखकों और बुद्धिजीवियों एक तरफ से तो देशप्रेम से ओतप्रोत रहते हैं दूसरी तरफ अ … more →

Tags: writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, इंडिया, हिंदी साहित्य, Internet, edcation

हिंदू विचारधारा:भारतीय और अफ़गानी-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक बात निश्चित है कि धर्म नितांत एक निजी विषय है और उस पर सार्वजनिक विषय पर चर्चा करना केवल एक दिखाव … more →

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बुद्धिजीवी समझाते है,पर समाज समझता नहीं-व्यंग्य आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा र … more →

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भारतीय भाषा दिवसः एक फ्लाप लेखक का विशेष संपादकीय2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोग आज इसे हिंदी दिवस कह रहे हैं पर एक हिंदी विद्वान का मत है कि इसे भारतीय भाषा दिवस के रूप में मना … more →

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अंतर्जाल पर विधा नहीं बल्कि कथ्य महत्वपूर्ण है-विशेष संपादकीय3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज यह दूसरा ब्लाग/पत्रिका है जिसने 30 हजार पाठ/पाठक संख्या को पार किया। इससे पहले हिंदी पत्रिका ने इ … more →

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विभिन्न समाजों का पुराने ढर्रे पर चलना अब कठिन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →

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जब टूटता है सन्नाटा-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच्छा … more →

Tags: inglish, कविता, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, साहित्य, हिंदी साहित्य, media, film

इस ब्लाग/पत्रिका की पाठक संख्या 25 हजार के पार-विशेष संपादकीय2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मेरा यह ब्लाग@पत्रिका पाठक संख्या 25 हजार पार कर गया। वेसे देखा जाये कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। … more →

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बनते बिगड़ते हैं रंग और इंसान -कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →

Tags: vyangya, vividha, inglish, संपादकीय, कविता, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

ब्लाग गिरा सकता है, भाषा की दीवारें-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर छद्म मित्रों और आलोचकों ने मेरी सोच को बहुत संकीर्ण बना दिया है। इसलिये अगर अपने ब्लाग/प … more →

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मनोरंजन के नाम पर कुछ भी थोपा जा रहा है-आलेख 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दस साल की उस बालिका ने मुझसे कहा कि-‘ मुझे पुराने गाने बहुत अच्छे लगते हैं। उसमें सब शब्द समझ में आत … more →

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