दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सच बात तो यह है कि दुनियां विश्वास के आधार पर तीन भागों में बंटी हुई हैं-आस्तिक,नास्तिक और स्वास्तिक … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अंतर्जाल पर हिंदी में सक्रिय कई ऐसे ब्लाग लेखक हैं जिन्हें लिखते हुए छह साल हो गये हैं। उन लोगों की … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: उस दिन चिट्ठकार चर्चा का नियमित ईमेल पढ़ा-यह ईमेल इसके सदस्यों को नियमित भेजा जाता है-जिसमें तमिल बच … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पता नहीं क्यों भारत के लेखकों और बुद्धिजीवियों एक तरफ से तो देशप्रेम से ओतप्रोत रहते हैं दूस … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: एक बात निश्चित है कि धर्म नितांत एक निजी विषय है और उस पर सार्वजनिक विषय पर चर्चा करना केवल एक दिखाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: लोग आज इसे हिंदी दिवस कह रहे हैं पर एक हिंदी विद्वान का मत है कि इसे भारतीय भाषा दिवस के रूप में मना … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: आज यह दूसरा ब्लाग/पत्रिका है जिसने 30 हजार पाठ/पाठक संख्या को पार किया। इससे पहले हिंदी पत्रिका ने इ … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मेरा यह ब्लाग@पत्रिका पाठक संख्या 25 हजार पार कर गया। वेसे देखा जाये कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर छद्म मित्रों और आलोचकों ने मेरी सोच को बहुत संकीर्ण बना दिया है। इसलिये अगर अपने ब्लाग/ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दस साल की उस बालिका ने मुझसे कहा कि-‘ मुझे पुराने गाने बहुत अच्छे लगते हैं। उसमें सब शब्द समझ में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको अपना समझकर सच कहा वह बेगाना समझने लगे जब तक उनकी लापरवाह अदाओं पर खामोश रहे उनको हम अच्छे लगे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी ब्लाग जगत का व्यवसायिक रूप करीब-करीब मैंने समझ लिया है और अब मुझे किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर लिखते हुए आप कोई बात दावे से नहीं कह सकते क्योंकि एक तो इसका क्षेत्र बृहद है और इसमें तक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल मीनाक्षी ने मुझे हतप्रभ कर दिया क्योंकि अपने ब्लाग (शब्द पत्रिका) पर मैंने जो लेख रखा था उस पर म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने कुछ अंग्रेजी ब्लाग के पाठों को हिंदी में अनुवाद कर उन्हें पढ़ा। इसमें कुछ भारतीय लेखकों द्वारा … more →