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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 3 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
वह कब आयेगी
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विनय प्रजापति wrote 1 week ago: वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी जिसका इंति … more »
राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना … more »
कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले कभी ते … more »
सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में अपनी … more »
आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा च … more »
शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद … more »
उफ़! यह मोहब्बत
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: “उफ़! यह मोहब्बत भी क्या चीज़ है कभी बोझ … more »
प्यार से मुझे प्यार चाहिए
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: प्यार से मुझको प्यार चाहिए गुलाबी लबो … more »
हम वो राही हैं जिन्हे
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hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: कुछ रंगो को तुलिका की ज़रूरत नहीं ह … more »
कविता हूँ मैं
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hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: हंसी खुशी ,रिश्ते नाते ,एहसास दोस्ती स … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
मेरी मोहब्बत है तू कहाँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है जिस … more »
तुमको लौट के यहीं आना है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) त … more »
ॐ शक्ति है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ॐ शक्ति है ॐ ही ईश्वर प्रतीक है ॐ नश्वर … more »
इक चाँद है आसमाँ में
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन दिल में … more »
हज़ारों की भीड़ में हम अकेले
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिस … more »
यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है मैं जिसको च … more »
रोते हैं सब से छिपकर
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें … more »
