Blogs about: Friends

Featured Blog

संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कबीर वाणी, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard

मनुस्मृति- कठिन जगह पर जाने से बचें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मनुस्मृति, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य

बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

परीक्षा परिणाम-हास्य व्यंग्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उतरा मूंह लेकर फंदेबाज घर आया और बोला- ‘दीपक बापू, बड़ा बुरा दिन आया हाईस्कूल के इम्तहान में मोहल्ले … more →

Tags: दीपक भारतदीप, समाज, हिन्दी, Family, hasya kavita, hasya vyang, Hindi writing, India, vyangya

राम और रावण की भूमिका-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह स्वस्थ्य सुंदर युवक रामलीला मंडली में भगवान श्री राम की भूमिका निभाता था। इसी कारण लोग उसको राम … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep

मुस्कराहट का मुखौटा-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: बेकद्रों की महफिल में मत जाना बहस के नाम पर वहां बस कोहराम मचेगा पर कौन, किसकी कद्र करेगा। मुस्करा … more →

Tags: समाज, हास्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

चांदी के कप की खातिर- हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: इतिहास में नाम दर्ज करने की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये वह किसी भी हद तक जाऐंगे। कहीं जिंदा आदमी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, रचना, लेखक, व्यंग्य

गुलामी जैसी आज़ादी-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →

Tags: hasya -vyangya, writer, hindi article, Hindi writing, vyangya kavita, Family, समाज, India, Deepak bharatdeep

‘‘मैं कुर्सी हूं, किसी की सगी नहीं’’-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कुर्सी पर चाहे लिपिक लिखा हो या महाप्रबंधक बस वह मिलना चाहिए। अपने घर में जिस पर स्वयं बैठ सकें वह ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, E-patrika

बाजार की आस्था या आस्था का बाजार-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच् … more →

Tags: मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, Family

चाणक्य नीतिः महल पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता।

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →

Tags: writer, aritile in hindi, hindi article, Hindi writing, Family, India, Blogger, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

भर्तृहरि नीति शतक: जिनकी देह,मन और विचार में अमृत हो ऐसे लोग नगण्य

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: मनसि वचसि काये पुण्यपीयूषपूर्णास्त्रिभुवनमुपकारश्रेणिभिः प्रीणयन्तः परगुणपनमाणून्पर्वतीकृत्य नित्यं … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द, साहित्य, हिन्दी

व्यंग्य सामग्री के लिये संस्कृति की आड़ की क्या जरूरत-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यह कोई आग्रह नहीं है यह कोई चेतावनी भी नहीं है। यह कोई फतवा भी नहीं है और न ही यह अपने विचार को किसी … more →

Tags: हिंदी आलेख, hindi article, Hindi writing, Family, समाज, Blogger, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web jagran

चेहरे कब तक बनावटी सामान से सजाओगे-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, Shayri, writer, Hindi writing, hindi kavita, vyangya kavita, India, Deepak bharatdeep

भर्तृहरि शतकः बुढ़ापे में भले काम की आदत नहीं पड़ सकती

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ———————– यावत्स्वस्थमिदं … more →

Tags: inglish, India, हिंदी साहित्य, साहित्य, media, Education, Internet, शब्द, web duniya

कागज़ पर कलम से जूते न सजाओ-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपनी कलम से कागज पर काली स्याही से जूता शब्द बार बार इस तरह न सजाओ कि आकाश से झुंड के झुंड बरसने लग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, रचना, हास्य, हिन्दी

‘कोई नहीं’ की चाहत मत करना (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आप सुबह किसी दुकान पर जाकर ऐसे ही खड़े होकर वहां रखी चीजें देखिये तो दुकानदार आपसे पूछेगा‘ आपको कौनसी … more →

Tags: hasya -vyangya, vyangya, writer, aritile in hindi, हिंदी आलेख, Hindi writing, समाज, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

पत्थर का बोझ-हास्य व्यंग्य कवितायेँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →

Tags: क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हास्य व्यंग्य


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “friends”:
Technorati Del.icio.us IceRocket