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समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Deepak bapu

वादा और इंतजार-व्यंग्य कविता (vada aur intzar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Family, hasya kavita, hasya vyang, hasya -vyangya

योगासन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा-हिन्दी लेख (hindi lekh on yogasan)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से द … more →

Tags: अनुभूति, आलेख, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, E-patrika, Family

युद्ध और सत्संग-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: धर्म के लिए अब नहीं होता सत्संग हर कोई लड़ रहा है, उसके नाम पर जंग. किताबों के शब्द का सच अब तलवार स … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कविता, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, दृश्य, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

नए स्वांग और मुखौटे-हास्य व्यंग्य कविताएँ (svang aur mukhaute-hindi satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: रोज रचते हैं नया स्वांग चेहरे पर लगाते नए मुखौटे और बदलकर आते हैं कपड़े मगर छद्म होकर भी करते हैं हमे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

रौशनी करने का सदियों पुराना अभियान-व्यंग्य कविता (raushni ka abhiyan-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: दीपावली पर घर में आले में बने मंदिर से लेकर गली के नुक्कड़ तक प्रकाश पुंज सभी ने जला दिये। अंतर्मन मे … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, व्यंग्य कविता, शायरी, सूचना, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

सेल के रोग का इलाज नहीं-हास्य व्यंग्य कविता (sel rog ka ilaj-hasya vyangyakavita)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया और हाथ में देते हुए बोला- ‘दीपक बापू, बूढ़े आदमियों के लिये तैयार … more →

Tags: मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

दीपावली का पर्व निकल गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →

Tags: abhivyakti, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, रचना, लेखक, व्यंग्य, संपादकीय

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूखी मन गयी दिवाली क्योंकि जेब थी खाली, ज़माने में अपना रुआब दिखाने के लिए सबसे कह रहे हैं”हैप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

बनाते हैं अपनी दुनियां खुद-हिंदी कविता (khud banate apne duinyan-hindi kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धरती पर अपने कदम दर कदम चलते हुए जब नजर करता हूं नीचे की तरफ तब जहां तक देखता हूं वहीं तक ख्याल चलते … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर, हिन्दी

लिखने की बीमारी जो है-व्यंग्य आलेख (likhne ki bimari-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर रचनाकर्म कोई आसान काम नहीं है। जो लेखक, कलाकर या कार्टूनिस्ट स्वयं न लिखकर दूसरे को अपनी … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिंदी, हिंदी आलेख, हिन्दी, Blogger, Deepak bharatdeep

तीक्ष्ण बुद्धि-हास्य कविता (sharp mind-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज के बच्चे अपने माता पिता के बाल्यकाल से अधिक तीक्ष्ण बुद्धि के पाये जाते यह सच कहा जाता है। किस ना … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

क्रिकेट मैच और हिंदी ब्लाग का आपसी रिश्ता-हास्य व्यंग्य (cricket match and hindi blog-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर लिखने के अलग ही अनुभव है। इनमें से कुछ अनुभव ऐसे हैं जो समाज की गतिविधियों से इस तरह परि … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, भारत, bharat, अनुभूति, Internet, web duniya

फिर से है जेहन में एक सवाल ....2 comments

Roushan wrote 1 month ago: बुझती  हुई  लौ  में रूकती  हुई  साँसों  में आपके  हर  ग़मों  के आहों  में  मैं  नहीं मैं  तो  हु  आप … more →

Tags: Devil, insaan, insaaniyat, dharm, jaati, bacche, hum , kon, Poems, roshan, roushan, roushank, something special in this, Ajeeb

नए अवतार का जाल-हास्य व्यंग्य कविता (naye avtar ka jaal-hindi hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, हास्य व्यंग्य, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, bharat, Deepak bharatdeep

समाज हिलता नजर आता हास्य व्यंग्य कविता (javani divani aur budhapa-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, India, bharat, शेर, अनुभूति, साहित्य, Bloging

बासी खबर में उबाल-हिंदी व्यंग्य कविता (basi khabar men ubal-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अखबार में छपी हर खबर पुरानी नहीं हो जाती है। कहीं धर्म तो कहीं भाषा और जाति के झगड़ों में फंसे इंसानी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

इश्क,मोबाइल और मंदी -हास्य व्यंग्य कविता (ishq mobil and economy-hindi comedy satire poem

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आशिक ने माशुका को समझाया ‘‘मोबाईल पर इतनी बात मत करो मैं नहीं उठा सकता खर्चा हर हफ्ते कपड़े भी न मांग … more →

Tags: अभिव्यक्ति, शायरी, भारत, bharat, yakeen, शेर, अनुभूति, हिंदी साहित्य, क्षणिका


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