Blogs about: Friendship
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बातों ही बातों में कोई बात हो
बातों ही बातों में कोई बात हो दिल से दिल की मुलाक़ात हो नज़रों से नज़रें कहें कुछ… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
बातों ही बातों में कोई बात हो
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: बातों ही बातों में कोई बात हो दिल से दि … more »
सदियाँ कटता रहूँगा
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: सदियाँ कटता रहूँगा वक़्त गुज़ारता रहूँ … more »
हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी जिसको लोहा क … more »
दिले-सहरा में यह कैसा सराब है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दिले-सहरा में यह कैसा सराब है ज़ख़्म मव … more »
हंसीन था ये सपना
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hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: मेरे आशियाने में , तेरी कसम तेरी ही कम … more »
तन्हाई मिटाने दो
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई मिटाने दो किस्से सुनाने दो सुब … more »
हम वो राही हैं जिन्हे
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hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: कुछ रंगो को तुलिका की ज़रूरत नहीं ह … more »
कविता हूँ मैं
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hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: हंसी खुशी ,रिश्ते नाते ,एहसास दोस्ती स … more »
making myself busy
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: i’ve heard, you’re in love is this true? it’s fabulous i’m asking becuase i … more »
के तुम आ गये
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hemjyotsana "Deep" wrote 3 months ago: एक गीत बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे क … more »
दीप कहाँ है तू ?
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hemjyotsana "Deep" wrote 4 months ago: आती है पश्चिम से ये तूफ़ानी हवाएँ , … more »
जिन्दगी में बहुत काम आया हमें
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hemjyotsana "Deep" wrote 4 months ago: जो गम देके तुमने सिखाया हमें । जिन्दगी … more »
आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है कल त … more »
हसीन उस नाज़नीन से कोई नहीं
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: हसीन उस नाज़नीन से कोई नहीं ज़्यादा उस म … more »
भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे
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hemjyotsana "Deep" wrote 4 months ago: एक नज़्म भीड़ में भी जब कोई तुम्हें … more »
हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे रु … more »
इश्क़ में इल्ज़ाम उठाने ज़रूरी हैं
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hemjyotsana "Deep" wrote 4 months ago: सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं | ना … more »
वबाए-इश्क़ से नजात कैसे हो
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: वबाए-इश्क़ से नजात कैसे हो नफ़रत हो तब इल … more »
शीशाए-अश्क आते रहे
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलात … more »
