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याद आया (गझल) - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 2 weeks ago: याद आया गझल घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गझल, घनश्याम ठक्कर, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग, Ghanshyam Thakkar

मरूध्यान ना बने (मुक्तक) - घनश्याम ठक्कर1 comment

kalapiketan wrote 1 month ago: मरूध्यान ना बने     मुक्तक   घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गझल, घनश्याम ठक्कर, मुक्तक, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट

मरूध्यान ना बने (मुक्तक) - घनश्याम ठक्कर1 comment

kalapiketan wrote 1 month ago: मरूध्यान ना बने     मुक्तक   घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गझल, घनश्याम ठक्कर, मुक्तक, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट

नही! (गझल) - घनश्याम ठक्कर1 comment

kalapiketan wrote 1 month ago:   नही! गझल घनश्याम ठक्कर   … more →

Tags: कविता, गझल, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग

परिचय - घनश्याम ठक्कर (Ghanshyam Thakkar = Oasis Thacker) 3 comments

kalapiketan wrote 1 month ago: घनश्याम ठक्कर (Ghanshyam Thakkar = Oasis Thacker) परिचय     Latest Posts ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત … more →

Tags: इन्स्ट्रुमेंटल रीमि, कविता, गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, संगीत़़, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल

बाढका खतरा करदो (गझल) घनश्याम ठक्कर 1 comment

kalapiketan wrote 2 months ago: बाढका खतरा करदो – गझल –   घनश्याम ठक्कर   Oasis Links ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત Blog – Gha … more →

Tags: कविता, घनश्याम ठक्कर, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग, Oasis Thacker, गझल, हिन्दी

अकेला

Maheep Saraf wrote 3 months ago: खोया खोया हूँ कई दिनों से, किस वज़ह से मुझे पता नहीं घना अंधेरा छाया हे नभ में, पर दिखती कोई घटा नही … more →

Tags: Hindi Poems, Life, हिन्दी, साहित्य, कविता, ग़ज़ल, hindi, Poem, Literature

मुझसे नाराज़ ना हो

Maheep Saraf wrote 3 months ago: बस एक बार बता दे ग़लती मेरी, चाहे फिर कभी बात ना हो मुस्करा दे एक बार अब तो, इस तरह मुझसे नाराज़ ना … more →

Tags: Hindi Poems: Romantic, Hindi Poems, Romantic, हिन्दी, साहित्य, कविता, ग़ज़ल, hindi, Literature

इन्सान अब बुत बनने लगे हैं - हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: असली इंसानों के चेहरे अब बुत की तरह नजर आते। लिखता कोई और संवाद, वह बोलते हुए दिख जाते।। बहुत पढ़ लि … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, समाज, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Family, Friends, hasya -vyangya, hindi kavita

यादें4 comments

Maheep Saraf wrote 3 months ago: अब समझ में आया लोग चाँद को खूबसूरत क्यों कहते हैं शायद मेरी तरह वो भी उसमे तेरी ही झलक को देखते हैं … more →

Tags: कविता, ग़ज़ल, साहित्य, हिन्दी, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, hindi, Poem

शिकायत

Maheep Saraf wrote 5 months ago: हर महफ़िल मे साथ ले जाता हूँ काफिला यादों की उनकी और वो कहते हें कि हम उन्हे याद नहीं करते सामने आते … more →

Tags: Hindi Poems: Romantic, Hindi Poems, Romantic, हिन्दी, साहित्य, कविता, hindi, Poem, Literature

ख्वाबों में आती हे रोजाना

Maheep Saraf wrote 6 months ago: ख्वाबों में आती हे रोजाना, कभी सामने ना आना, छलक जाएगा जो सागर आंखों में हैं . फिर होश में ना आऊंगा … more →

Tags: Hindi Poems, Romantic, हिन्दी, साहित्य, ग़ज़ल, hindi, Literature, Maheep, Poem

उसूलों पे जहाँ आँच आये - वसीम बरेलवी2 comments

Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: मशहूर शायर वसीम बरेलवी साहब की एक खूबसूरत ग़ज़ल पेश कर रहा हूँ जो ज़माने के लिए एक आईने की तरह है:- … more →

Tags: वसीम बरेलवी, Ghazal

आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ - गुलज़ार

Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ चूल्हा नहीं जलाये या बस् … more →

Tags: गुलज़ार, Ghazal, गुलज़ार, guljar, Gulzar

सिर्फ़ प्रयास

joshikavirai wrote 8 months ago: जब तक तेरे पास रहे | एक सुखद एहसास रहे | मुस्काते ही आँसू आए महफ़िल में उपहास रहे | मन में अम्बर का … more →

Tags: begaane mausam, ghazal - older, prayaas, Misfit

दुनिया इतनी बुरी नहीं है

joshikavirai wrote 9 months ago: दो बातें दो पल कर देखो | साथ हमारे चल कर देखो | दुनिया इतनी बुरी नहीं है ख़ुद से ज़रा निकल कर देखो … more →

Tags: ghazal - older, begaane mausam, Ego, Satire, Vision

पानी हर पत्थर में है

joshikavirai wrote 9 months ago: सूरज रोज़ सफ़र में है | फ़िर तू ही क्यों घर में है ? अपने बाज़ू तोलो तो पानी हर पत्थर में है | वो परद … more →

Tags: begaane mausam, ghazal - older, Satire, Poetry, hamid

sushilgirdher wrote 10 months ago: तेरी यादों को समेटकर रखें भी तो कहां दामन तो पहले ही शिकवों से भरा है। … more →

Tags: याद, दामन, शिकवा, hindi, Poetry, Kavita, Sher, Dard

AAJ KE INSAAN

gopaldas wrote 11 months ago:     BHOOKHE NANGE KI ROTI CHHINAANE LAGE,   AAJ KE INSAAn BHI KYA-KYA KHAANE LAGE?     AAJ HUM APNA … more →


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