BHOOKHE NANGE KI ROTI CHHINAANE LAGE, AAJ KE INSAAn BHI KYA-KYA KHAANE LAGE? AAJ HUM APNA WO HI SABAK HAIn BHOOLE, SEEKHNE ME JISE THE ZAMAANE LAGE..!! SOCHTE HAIn KI ISKO AB KAISE TH… more →
Gopaldas's Weblogkalapiketan wrote 2 weeks ago: याद आया गझल घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: नही! गझल घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: घनश्याम ठक्कर (Ghanshyam Thakkar = Oasis Thacker) परिचय Latest Posts ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત … more →
kalapiketan wrote 2 months ago: बाढका खतरा करदो – गझल – घनश्याम ठक्कर Oasis Links ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત Blog – Gha … more →
Maheep Saraf wrote 3 months ago: खोया खोया हूँ कई दिनों से, किस वज़ह से मुझे पता नहीं घना अंधेरा छाया हे नभ में, पर दिखती कोई घटा नही … more →
Maheep Saraf wrote 3 months ago: बस एक बार बता दे ग़लती मेरी, चाहे फिर कभी बात ना हो मुस्करा दे एक बार अब तो, इस तरह मुझसे नाराज़ ना … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: असली इंसानों के चेहरे अब बुत की तरह नजर आते। लिखता कोई और संवाद, वह बोलते हुए दिख जाते।। बहुत पढ़ लि … more →
Maheep Saraf wrote 3 months ago: अब समझ में आया लोग चाँद को खूबसूरत क्यों कहते हैं शायद मेरी तरह वो भी उसमे तेरी ही झलक को देखते हैं … more →
Maheep Saraf wrote 5 months ago: हर महफ़िल मे साथ ले जाता हूँ काफिला यादों की उनकी और वो कहते हें कि हम उन्हे याद नहीं करते सामने आते … more →
Maheep Saraf wrote 6 months ago: ख्वाबों में आती हे रोजाना, कभी सामने ना आना, छलक जाएगा जो सागर आंखों में हैं . फिर होश में ना आऊंगा … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: मशहूर शायर वसीम बरेलवी साहब की एक खूबसूरत ग़ज़ल पेश कर रहा हूँ जो ज़माने के लिए एक आईने की तरह है:- … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ चूल्हा नहीं जलाये या बस् … more →
joshikavirai wrote 8 months ago: जब तक तेरे पास रहे | एक सुखद एहसास रहे | मुस्काते ही आँसू आए महफ़िल में उपहास रहे | मन में अम्बर का … more →
joshikavirai wrote 9 months ago: दो बातें दो पल कर देखो | साथ हमारे चल कर देखो | दुनिया इतनी बुरी नहीं है ख़ुद से ज़रा निकल कर देखो … more →
joshikavirai wrote 9 months ago: सूरज रोज़ सफ़र में है | फ़िर तू ही क्यों घर में है ? अपने बाज़ू तोलो तो पानी हर पत्थर में है | वो परद … more →
sushilgirdher wrote 10 months ago: तेरी यादों को समेटकर रखें भी तो कहां दामन तो पहले ही शिकवों से भरा है। … more →
gopaldas wrote 11 months ago: BHOOKHE NANGE KI ROTI CHHINAANE LAGE, AAJ KE INSAAn BHI KYA-KYA KHAANE LAGE? AAJ HUM APNA … more →