तुम क्या जलाओगे मुझे, मैंने आग खुद को लगायी हैं मुझे मौत से न डराओ तुम, मैंने रात कब्र में बितायी हैं फूल खुशबु रंग बांटें, और बांटें हैं इंसान भी जो बात खुदा न कर सका, वो तुमने कर दिखाई हैं कह भी दूँ… more →
Vikasvardhan's Weblogvikasvardhan wrote 8 months ago: तुम क्या जलाओगे मुझे, मैंने आग खुद को लगायी हैं मुझे मौत से न डराओ तुम, मैंने रात कब्र में बितायी है … more →
vikasvardhan wrote 8 months ago: फंसी है लाख फंदों में, ये ज़िन्दगी महंगी पड़ी बुत परस्तो की दुनिया में, बंदगी महंगी पड़ी एक कली दिल की … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: तुम्हें सामने पाया तो हम, हम न रह गए कुछ और कहना चाहा कुछ और कह गए कौन जाने किसे देख कर कब होश उड़ ज … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: अंधेरो में बीती उम्र उसकी, उजाले देख कर वो रो पड़ा तेरे आने की जो ख़बर सुनी , वो मुस्कुराके के रो पड़ा … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: हम उनसे और वो हमसे रात दिन मिलते रहे जाने फिर क्यों दूर दूर हम उम्र भर चलते रहे लम्हों की रेत पे गिर … more →
vikasvardhan wrote 2 years ago: ज़ल्दी ज़ल्दी तो रोज़ जीते हैं, कभी हौले हौले भी जिया जाए जहान मिलकर जो कमी खलती हैं, चले अब ख़ुद से … more →