जहाँ तक मनुस्मृति , गीता आदि ग्रन्थों के दलित विरोध को पुष्ट करने का प्रश्न है , गांधी जी का दृष्टिकोण स्पष्ट है ।उन्हें यह विश्वास था कि वे हिन्दू धर्म का एक सुधरा स्वरूप भारतीय समाज से ग्रहण करवा ले… more →
समाजवादी जनपरिषदKrishna Kumar Mishra wrote 1 month ago: कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लियेक १७ तारीख यानी दीपावली भार … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः। वेदावादरताः पार्थ नान्यदरस्तीति वादिनः।। कामात्मानः स्वर … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः। वेदावादरताः पार्थ नान्यदरस्तीति वादिनः।। कामात्मानः स्वर … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: जहाँ तक मनुस्मृति , गीता आदि ग्रन्थों के दलित विरोध को पुष्ट करने का प्रश्न है , गांधी जी का दृष्टिक … more →