काहे रे फकीरा खुश तू काहे रे फकीरा खुश घर देखे न राह कोई न कोई साथी साथ तेरे आंसू एक न आँखों में न मंजिल कोई राह तके क्या देख देख मुस्काए तू किस बात से मन बहलाए तू काहे रे फकीरा खुश तू काहे रे फकीरा ख… more →
Vikasvardhan's WeblogYogendra Pal wrote 2 months ago: अभी तक हम-आप सभी किताबों से सीखते आये हैं| सही भी है, किताबों से अच्छा कोई सिखा भी नहीं सकता और किता … more →
M wrote 4 months ago: Here are lyrics of “Choti si Umar” Songs, I just love this songs. छोटी सी ऊमर परणायी ओ ब … more →
M wrote 4 months ago: I am trying to find some good rajashtani songs, some are very common and you can find on youtube, ho … more →
महावीर wrote 5 months ago: रविवार ३१ मई २००९ को काव्य धारा लन्दन के विशेष कार्यक्रम में पुष्पा भार्गव के काव्य संग्रह ‘लह … more →
M wrote 5 months ago: I grew up with home remedies and Ayurveda and know little bit about them so will post some proven tr … more →
vikasvardhan wrote 5 months ago: काहे रे फकीरा खुश तू काहे रे फकीरा खुश घर देखे न राह कोई न कोई साथी साथ तेरे आंसू एक न आँखों में न म … more →
M wrote 6 months ago: I do not have anything to write today. Its really hard to think about a topic and write on it, Speci … more →
M wrote 6 months ago: Finally…… my first post. I am thinking about creating a blog from past 2-3 years. I alwa … more →
vikasvardhan wrote 8 months ago: कुछ लोग जो देके चले गए, क्या ख़ाक संभाला है हमने चेहरा तो सजा के रखा है, स्वाभिमान जला डाला हमने क्या … more →
vikasvardhan wrote 8 months ago: किसी का था जो दर्द कभी, किसी की वो दवा बना आंसू जो उतरा पन्नो पे, फिर लबों पे वो दुआ बना वो रंग सुर् … more →
vikasvardhan wrote 8 months ago: नज़रों से तेरी जो दूर हुए हमें कहीं न पनाह मिली अपनी सूरत भी भूल गए तुझसे बिछडे तो ये सजा मिली आँचल … more →
vikasvardhan wrote 11 months ago: कब रात रुके कब सहर चले किस ओर ये दिन दोपहर चले मुझे कौन बुलाये उस नगरी किस डगर पे मेरे पैर चले एक गा … more →
महावीर wrote 11 months ago: आतंक के युद्ध में जीत!!! यह सब से बड़ा आतंकी हमला था। १० आतंकियों को मार कर आतंक के खिलाफ यह जंग जीत … more →
vikasvardhan wrote 1 year ago: यूँ खिलते फूल यहाँ लाखों, एक ये ही गुल न खिल पाया अपनी बनाई दुनिया में, क्यों खुदा को इश्क न मिल पा … more →
vikasvardhan wrote 1 year ago: तेरी नज़र गगन पे है, मैं दो गज ज़मीन मे खुश जो सब पाके तू खुश है, तो मैं हर कमी मे खुश मैं मंद पवन का … more →
vikasvardhan wrote 1 year ago: अब गरजो तुम यों झूम के, धरती डोले पग चूम के सीना चौडा हो अम्बर का, देखे तुमको जग घूम के वक्त की धारा … more →
महावीर wrote 1 year ago: मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” भाग 2 सूचनाः देखने वालों के अनुरोध पर ‘मुशायरे का … more →
महावीर wrote 1 year ago: मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” (पहला भाग) दोस्तों, प्राण शर्मा जी का और मेरा (महावीर शर्मा) आप सभी … more →
vikasvardhan wrote 1 year ago: पूर्व से पश्चिम तुम घूमो, एक पल न क्यों रुक पाते हो कहीं देखे तेरी राह कोई, तुम रात कहाँ पे बिताते ह … more →