घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को ये ज़बां चलती है नासेह के छुरी चलती है ज़ेबा करने मुझे आय है के समझाने को आज कुछ और भी पी लूं के सुना है मैने आते हैं हज़रत-ए-वा… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को ये ज़बां चलती है नासेह के … more →