ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है नवा-ए-दर्द सुनाओ बड़ी उदास है रात उदासियों के जो हमराज़-ओ-हमनफ़स थे कभी उन्हें ना दिल से भुलाओ बड़ी उदास… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है … more →