इन्तिहा आज इश्क की कर दी, आप के नाम ज़िन्दगी कर दी, था अँधेरा गरीब खाने में, आप ने आ के रोशनी कर दी, देने वाले ने उन को हुस्न दिया, और अता मुझ को आशिकी कर दी, तुम ने जुल्फों को रुख पे बिखरा कर, शाम रं… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामkavideepaksharma wrote 2 months ago: जिस पर मुझे ज़रूरत से ज्यादा गुमान था दिल उस शख्स का बहुत बेईमान था बिखरा हुआ पड़ा था एक साया उसके प … more →
kavideepaksharma wrote 2 months ago: जो रोज़ चलती रही जि़स्म पर गोलियाँ और मनती रही खून की होलियाँ तो एक दिन हकीकत हम भूल जायेंगे हो … more →
Amarjeet Singh wrote 2 months ago: इन्तिहा आज इश्क की कर दी, आप के नाम ज़िन्दगी कर दी, था अँधेरा गरीब खाने में, आप ने आ के रोशनी कर दी, … more →
Amarjeet Singh wrote 4 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →
Amarjeet Singh wrote 4 months ago: आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा इतना मानूस न हो ख़िलवतेग़म से … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: मशहूर शायर वसीम बरेलवी साहब की एक खूबसूरत ग़ज़ल पेश कर रहा हूँ जो ज़माने के लिए एक आईने की तरह है:- … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ चूल्हा नहीं जलाये या बस् … more →
nakkarkhana wrote 7 months ago: आँख में स्वपन कब था किसी रात का दर्द दिल में … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 8 months ago: जब खुली आँखें तो इन आँखों को रोना आ गया मैंने समझा वाकई मौसम सलोना आ गया डर रहा हूँ बेनियाज़ी अब कहा … more →
joshikavirai wrote 8 months ago: आपका पूरा प्रदर्शन हो गया है | हर जगह पर दूरदर्शन हो गया है | अब न बदलेंगे यहाँ मौसम कभी मुल्क का व … more →
joshikavirai wrote 8 months ago: केवल उधार है खातों में, कब अन्न पड़ा इन आंतों में, था एक वोट जो सौंप दिया, सरकार! तुम्हारे हाथों में … more →
joshikavirai wrote 8 months ago: फ़ाइलों में फ़सल हो रहे हैं | रेत में भी कमल हो रहे हैं | वक़्त को तुक नहीं मिल रही है आप ताज़ा ग़ज़ल … more →
अफ़लातून wrote 10 months ago: ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे तू बहुत देर से मिला है मुझे हमसफ़र चाहिये हूज़ूम नहीं इक मुसाफ़िर भी का … more →
ghazal123 wrote 10 months ago: कभी फूलो कभी बहारो ने लूटा, कभी मझधार कभी किनारों ने लूटा. लुटते रहे कदम कदम पर हम, कभी नजरो कभी इश … more →
ghazal123 wrote 10 months ago: TUM NAHI HOTE TO TUMAHARA KHAYAL HOTA HAI, PHIR SE KAB MILOGE BUS YE HI SAWAL HOTA HAI. HAR DHADKAN … more →
अफ़लातून wrote 12 months ago: एक ग़र चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे क्या इनसे किसी कौम की तक़दीर बदल दोगे जायस से वो हिन्दी की दरिया … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: उफ़ ये निगाहे उस पे खुमार की बातें , ख्वाबो के प्याले ,उनके दरों-दिवार की बातें । कत्ल कब के हुऎ और श … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: बात नहीं करनी ना करना तुम , फासला मगर ना करना तुम , खाक होने से पहले जो पुकारूँ नाम , सुन के अनसुना … more →