Blogs about: Ghazal
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घर से हम निकले थे
घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को ये ज़… more »
कुछ पल जगजीत सिंह के नाम
घर से हम निकले थे
Amarjeet Singh wrote 4 weeks ago: घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को … more »
एक दीवाने को
Amarjeet Singh wrote 4 weeks ago: एक दीवाने को ये आये हैं समझाने कई पहले … more »
बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो
Amarjeet Singh wrote 4 weeks ago: बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो ये क्या कर … more »
खुमारी चढ़ के उतर गई
Amarjeet Singh wrote 4 weeks ago: खुमारी चढ़ के उतर गई ज़िंदगी यूं ही गुज … more »
मिलकर जुदा हुए तो
Amarjeet Singh wrote 1 month ago: मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम, एक द … more »
तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे
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Amarjeet Singh wrote 1 month ago: तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे, ज … more »
ऐसी आंखें नही देखी
Amarjeet Singh wrote 1 month ago: ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा, ऐ … more »
मिठी बोली हो गई
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hemjyotsana "Deep" wrote 1 month ago: रंगो ने की रंगो से बातें होली हो गई । मस … more »
मुझसे मिलने के वो करता था बहाने कितने
Amarjeet Singh wrote 1 month ago: मुझसे मिलने के वो करता था बहाने कितने, … more »
हम तो हैं परदेस में
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Amarjeet Singh wrote 1 month ago: हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा … more »
दिल के उजले कागज़ पर
Amarjeet Singh wrote 1 month ago: दिल के उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखें, ब … more »
नग़मे खिलने लगे हैं
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »
मेरी आँखों पर जो था
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँच … more »
गम मुझे हसरत मुझे
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Amarjeet Singh wrote 1 month ago: गम मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे, … more »
वो दिल ही क्या
Amarjeet Singh wrote 1 month ago: वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न कर … more »
उडती तितली की तरह
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hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: उदास रात की कोई सुबह हसीन नहीं । नहीं आ … more »
अधूरी गजल छोड़ गए फाकिर
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Amarjeet Singh wrote 2 months ago: माडल टाउन के आर्य समाज मंदिर में एक छो … more »
कविता हूँ मैं
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hemjyotsana "Deep" wrote 2 months ago: हंसी खुशी ,रिश्ते नाते ,एहसास दोस्ती स … more »
चलती राहो में यूं ही आंख लगी है फाकिर
Amarjeet Singh wrote 2 months ago: वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी.. हे र … more »
