उसने हमसे कभी वफ़ा न की और हमने भी तमन्ना न की बहुत बोलते हैं सब ने कहा सो आदत-ए-कमनुमा न की बहुत आये बहुत गये मगर जान किसी पर फ़िदा न की उसने कही और हमने मानी उसकी कोई बात मना न की ख़ता-ए-इश्क़ के बाद ह… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 5 months ago: उसने हमसे कभी वफ़ा न की और हमने भी तमन्ना न की बहुत बोलते हैं सब ने कहा सो आदत-ए-कमनुमा न की बहुत आये … more →
Praful wrote 6 months ago: * Treasure every moment that you have! * And treasure it more because you shared it with s … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है फिर से वही गुज़रा हुआ ज़माना ढूँढ़ता है वह एक पल जो थम के रह गया … more →
विनय wrote 1 year ago: यह प्यार चीज़ क्या है? दीवानों का है काम बेकार ही पीछे दौड़ते हैं बिन सोचे अन्जाम कहते थे कि प्यार हम … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए एक बार तो कुछ कह दे सनम तू एक बार … more →
विनय wrote 1 year ago: नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया देख … more →
विनय wrote 1 year ago: ‘नज़र’ वो नज़र जो लग जाये तो तबाह कर दे अपनी पे आये तो हर इक अदू को बरबाद कर दे उसका तैशो … more →