Lost your password?

Blogs about: Global Dashboard

Featured Blog

महात्मा गांधी नोबल नहीं वरन् ग्लोबल थे-आलेख (mahatma gandhi and noble

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नोबल पुरस्कार देने वालों ने वाकई हास्यास्पद स्थिति का निर्माण किया है। उन्होंने अमेरिका के कट्टर विर … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अनुगूँज, अनुभूति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, समाज

संत कबीर के दोहे-बिना अनुभव के ज्ञान देना अनुचित

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कूकट कूटै कन बिना, बिन करनी का ज्ञान। ज्यौं बन्दूक गोली बिना, भड़क न मरि आन।। संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →

Tags: hindi Personal, Hindi knowledge, bharat, hindi abhivyakti, hindi megzine, Hindi Blogging, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, आलेख

श्री गीता से-दूसरे के रोजगार का नाश करना तामस प्रकृत्ति का परिचायक (shri gita sandesh in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः। विषादी दीर्घसूत्रीच कर्ता तामस उच्यते।। हिंदी में भावार … more →

Tags: hindi adhyatm, hindi abhivyakti, bhagavan shri krishn, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, आलेख, आध्यात्म, हिंदी पत्रिका, Anubhuti

भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरोध … more →

Tags: आलेख, कथा साहित्य, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हिंदी, हिंदी कविता, हिंदी पत्रिका, हिंदी साहित्य

कबीर के दोहेः दिल टूटने पर कुछ भी नहीं अच्छा लगता

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: धरती फाटे मेघ मिलै, कपड़ा फाटे डौर तन फाटे को औषधि, मन फाटे नहिं ठौर संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, आलेख, दृष्टिकोण, हिंदी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Family, hindi duniya

कबीर के दोहे:दो मुखों से काम करने पर पड़ता है थप्पड़

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: जौ मन लागै एक सों, तो निरुवारा जाय तूरा दो मुख बाजता, घना तमाचा खाय संत श्री कबीरदास जी कहते हैं अगर … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindu dharm, web duniya, Kabir, hindi shabd

इंसान को पंख नहीं लगा सकता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: जमीन पर आते हुए इंसान ने सर्वशक्तिमान से कहा ‘इस बार इंसान बनाया है इसके लिये शुक्रगुजार हूं पर मुझे … more →

Tags: writing, कविता, दृष्टिकोण, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, अनुभूति, हिंदी साहित्य, Internet, arebic

जिंदगी क्या जंग से कम है-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →

Tags: अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Dashboard, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

लेखक लिखने के ही नहीं पढने के भी भूखे होते हैं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच तो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, Deepak bharatdeep

रहीम के दोहेःपशुओं की टांग खाने पर दवा भी लेनी पड़ती है2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि लोग तो … more →

Tags: Blogroll, Hindi friends, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, hindi bharat, hindu dharm, hindi duniya

गीत संगीत की महफिल की बजाय महायुद्ध सजाते-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →

Tags: Blogroll, hindi journlism, hindi web, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar

इसलिए आज हमने कोई व्यंग्य नहीं लिखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिको … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, हिन्दी, अभिव्यक्ति, सूचना, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य

इंटरनेट पर हिंदी का वैश्विक काल प्रारंभ हो चुका है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लिय … more →

Tags: आलेख, चिन्तन, web bhaskar, web navabharat, Sahitya, साहित्य, शब्द, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

आस्तिक, नास्तिक और स्वास्तिक- (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: सच बात तो यह है कि दुनियां विश्वास के आधार पर तीन भागों में बंटी हुई हैं-आस्तिक,नास्तिक और स्वास्तिक … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, साहित्य, हंसना, हास्य व्यंग्य, हिंदी, हिंदी साहित्य, हिन्दी

ब्रेकिंग न्यूज (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनके … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, India, yakeen, अनुभूति, हिंदी साहित्य, vividha, Internet

मनु स्मृति: जो कार्य हृदय को कष्ट दे उसे न करें

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अपन … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindi Darshan, India, hindi bharat, hindi duniya

आदमी ख़ुद ही खिलौना बन जाता -हिंदी व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →

Tags: inglish, कविता, bharat, India, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, अनुभूति

भर्तृहरि शतकः इच्छाओं की आग गुणों को जला देती है

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →

Tags: Hindi Education, Hindi friends, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindu darshan, Hindu culture, hindi bharat, hindi india


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS