Blogs about: Global Dashboard

Featured Blog

भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरो … more →

Tags: आलेख, कथा साहित्य, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हिंदी, हिंदी कविता, हिंदी पत्रिका, हिंदी साहित्य

कबीर के दोहेः दिल टूटने पर कुछ भी नहीं अच्छा लगता

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: धरती फाटे मेघ मिलै, कपड़ा फाटे डौर तन फाटे को औषधि, मन फाटे नहिं ठौर संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →

Tags: Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindu darshan, Hindu culture, hindi duniya, web duniya, hindi family, web dunia

कबीर के दोहे:दो मुखों से काम करने पर पड़ता है थप्पड़

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जौ मन लागै एक सों, तो निरुवारा जाय तूरा दो मुख बाजता, घना तमाचा खाय संत श्री कबीरदास जी कहते हैं अग … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindu dharm, web duniya, Kabir, hindi shabd

इंसान को पंख नहीं लगा सकता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जमीन पर आते हुए इंसान ने सर्वशक्तिमान से कहा ‘इस बार इंसान बनाया है इसके लिये शुक्रगुजार हूं पर मुझे … more →

Tags: writing, कविता, दृष्टिकोण, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, अनुभूति, हिंदी साहित्य, Internet, arebic

जिंदगी क्या जंग से कम है-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →

Tags: अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Dashboard, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

लेखक लिखने के ही नहीं पढने के भी भूखे होते हैं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच त … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, Deepak bharatdeep

रहीम के दोहेःपशुओं की टांग खाने पर दवा भी लेनी पड़ती है2 comments

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि लोग तो … more →

Tags: Blogroll, Hindi friends, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, hindi bharat, hindu dharm, hindi duniya

गीत संगीत की महफिल की बजाय महायुद्ध सजाते-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →

Tags: आलेख, ज्ञान, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

इसलिए आज हमने कोई व्यंग्य नहीं लिखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिक … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, हिन्दी, अभिव्यक्ति, सूचना, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य

मौसम पर कविता नहीं लिखेंगे-हास्य कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, गर्मी में हो रही बरसात जहां रुलाता पसीना, वहां करती बहार अपनी बात ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर

पास के विद्वान भी बैल बन जाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू मैं हीरो का ब्लाग पढ़कर आया हिंदी तो ढंग से पढ़ना नहीं आती पर उसका अ … more →

Tags: Kavita, शेर-ओ-शायरी, inglish, शायरी, हास्य व्यंग्य, India, bharat, शेर, साहित्य

संत कबीर वाणीःहमारे घट में है ज्ञान का भंडार2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह इस ब्लाग/पत्रिका की सौवीं पोस्ट है) सहकामी तू घट में करै, घट ही में करतार घट ही भीतर पाइये, सुर … more →

Tags: Blogroll, Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, bharat

रहीम के दोहेःगुणहीन व्यक्ति पशु के समान1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन सो न कछु गनै, जासों, लागे नैन सहि के सोच बेसाहियो, गया हाथ को चैन कविवर रहीम कहते हैं कि जिन म … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, bharat

इंटरनेट पर हिंदी का वैश्विक काल प्रारंभ हो चुका है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लि … more →

Tags: आलेख, चिन्तन, दर्शन, दीपक भारतदीप, शब्द, साहित्य, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bharatdeep

आस्तिक, नास्तिक और स्वास्तिक- (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सच बात तो यह है कि दुनियां विश्वास के आधार पर तीन भागों में बंटी हुई हैं-आस्तिक,नास्तिक और स्वास्तिक … more →

Tags: hindi, writing, हिन्दी, inglish, हिंदी, व्यंग्य चिंतन, yakeen, India, हास्य व्यंग्य

ब्रेकिंग न्यूज (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनक … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, India, yakeen, अनुभूति, हिंदी साहित्य, vividha, Internet

मनु स्मृति: जो कार्य हृदय को कष्ट दे उसे न करें

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अप … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindi Darshan, India, hindi bharat, hindi duniya

आदमी ख़ुद ही खिलौना बन जाता -हिंदी व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →

Tags: inglish, कविता, bharat, India, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, अनुभूति

भर्तृहरि शतकः इच्छाओं की आग गुणों को जला देती है

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →

Tags: Hindi Education, Hindi friends, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindu darshan, Hindu culture, hindi bharat, hindi india


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “global-dashboard”:
Technorati Del.icio.us IceRocket