पिछले भाग से आगे : वैसे तो यह औद्योगिक व्यवस्था पूंजीवाद द्वारा पैदा की गयी है जिसमें निजी स्वामित्व की प्रधानता है , लेकिन धीरे धीरे उद्योगों का यह ढांचा , जो वृहद कॉर्पोरेशनों के रूप में विकसित हुआ … more →
समाजवादी जनपरिषदअफ़लातून wrote 1 month ago: पिछले भाग से आगे : वैसे तो यह औद्योगिक व्यवस्था पूंजीवाद द्वारा पैदा की गयी है जिसमें निजी स्वामित्व … more →
अफ़लातून wrote 1 month ago: [ २८ , २९ , ३० अक्टूबर २००९ को धनबाद में समाजवादी जनपरिषद का द्विवार्षिक सम्मेलन सम्पन्न हुआ । सम्मे … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: “Labour Laws and New Forms of Working Class Resistance in the Era of Globalisation” 25 J … more →
अफ़लातून wrote 5 months ago: Technorati tags: शिक्षा अधिकार विधेयक, सुनील, झुनझुना. भारत के संविधान में नीति निर्देशक तत्वों में … more →
अफ़लातून wrote 7 months ago: पशुजन्य बिमारियो का नया आतंकवाद औद्योगिक पशुपालन से पैदा होती महामारियां दुनिया में अचानक एक नया आतं … more →
अफ़लातून wrote 7 months ago: Technorati tags: प्रजातंत्र, लोकतंत्र, जनतंत्र, धनतंत्र, किशन पटनायक, चुनाव ( जून , २०० … more →
अफ़लातून wrote 9 months ago: इस सैद्धान्तिक अन्तर्विरोध का हल खोजने की कोशिश में हम एक नये सत्य पर पहुचते हैं । दरअसल पूंजीवाद का … more →
अफ़लातून wrote 9 months ago: लेखक समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा अर्थशास्त्री हैं |डा. राममनोहर लोहिया की प्रसिद्ध पुस … more →
Praful wrote 1 year ago: Why did the terrorists choose to attack, of all places, the Nariman House in Mumbai? It is a story t … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक लक्ष्मीनारायण मित्तल । इन्हें इस्पात-नरेश भी कहा जाता है । भार … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: स्रोत, साभार : मंगलवार, 30 सितंबर, 2008 को 18:42 GMT तक के समाचार ‘नाजुक दौर में है अमरीकी अर … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: ”उपभोग जीवन की बुनियादी जरूरत है . इसके बगैर न जीवन सम्भव है और न वह सब जिससे हम जीवन में आनन्द का अ … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: ‘ विचारधारा और इतिहास के अंत की ‘ घोषणाओं का वैश्वीकरण के हक़ में एक निश्चित बौद्धिक सहयो … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: ‘बौद्धिक साम्राज्यवाद की शिनाख्त’ शीर्षक से ७ दिसम्बर २००५ को जनसत्ता के सम्पादकीय पृष्ट … more →
अफ़लातून wrote 2 years ago: मानव समाज में खेती का स्थान तीन कारणों से महत्वपूर्ण रहा है और रहेगा । एक , अमरीका-यूरोप में … more →
अफ़लातून wrote 2 years ago: Technorati tags: औद्योगीकरण का अन्धविश्वास, superstition of industralisation, mahatma gandhi, marx … more →
अफ़लातून wrote 2 years ago: चीन में बड़े पैमाने पर धुँआधार ‘विकास’ के खिलाफ़ एक महिला की इच्छा-शक्ति के प्रदर्शन और पर … more →
अफ़लातून wrote 2 years ago: Technorati tags: india shining, growth, fdi, sez विकास दर के आँकड़े कितने भ्रामक हो सकते हैं , वि … more →