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Blogs about: Glogbal Dashborad

भर्तृहरि शतकः बेइज्जत होने पर भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: राजा भर्तृहरि कहते हैं कि —————– भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्रा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, bharat, हिंदी साहित्य, media, Blogger, web duniya, hindi thougnt, web dunia, दीपकबापू

मन के समंदर में लहर और नाव का खेल2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन के समंदर में उठती लहरें कई नाम है जो नाव की तरह लहराते निकल जाते हैं जिसका किनारा आ गया वह साथ छो … more →

Tags: Blogroll, inglish, संवेदना, चिन्तन, हिंदी साहित्य, Shayri, media, Bloging, Life

सब मिल गया फिर उन्हें और क्या चाहिए-हास्य व्यंग्य 7 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह क्रिकेट खेले और विश्व कप जीतकर प्रतिष्ठा का वह इतना शिखर छू लें-जो एक आदमी के लिए दिवास्वप्न हो। … more →

Tags: Blogroll, inglish, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, India, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य

मनुस्मृति:राज्य सभी धर्मों के पालन कराने वाला मध्यस्थ 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड दे … more →

Tags: dharm, संपादकीय, हिंदी साहित्य, media, Education, Friends, Blogger, Blogging, arebic

अपना तनाव और थकावट बढाते हैं खुद लोग-आलेख 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हमारे दर्शन के अनुसार मनुष्य योनि बहुत पुण्य करने पर मिलती है और अगर कोई इस योनि में दान-पुण्य और धर … more →

Tags: Blogroll, अभिव्यक्ति, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, संवेदना, चिन्तन, हिंदी साहित्य

इसलिए महिला दिवस पर कुछ नहीं लिखा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज महिला दिवस है और मैं अपने आसपास देख रहा हूँ की शायद ही कोई महिला हो जिसे यह मालुम हो और अगर मालुम … more →

Tags: Blogroll, inglish, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, चिन्तन, साहित्य, Education, Internet

छूकर देखो अपना मन (कविता साहित्य)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मनोरंजन के लिए किसी दृश्य, वस्तु या आदमी की चाहत इन्सान को मजबूर करती है इधर-उधर जाने के लिए बाजार म … more →

Tags: Blogroll, Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, भारत, bharat

रहीम के दोहे:परिश्रम कर भोजन ग्रहण करें 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चाह गयी चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह जिनको कछु न चाहिए। वे साहन के साह कविवर रहीम का कहना है कि इस संसार … more →

Tags: Blogroll, dharm, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य, Education, Friends, freinds, Blogger

चाणक्य नीति:घी दूध से सींच गया नीम का वृक्ष मीठा नहीं होता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इतने भारी शरीर वाला हाथी छोटे से अंकुश सा वश में किया जाता है. सब जानते हैं की अंकुश परिमाण में हा … more →

Tags: Blogroll, Global Dashboard, inglish, अभिव्यक्ति, Thought, bharat, सूचना, आचरण, हिंदी साहित्य

नेकी का रास्ता और भूलने का दरिया

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मौसम की तरह लोग भी बदल जाते हैं सर्दी में गर्मी की यादें नहीं आती मुसीबत की घडी में जो साथ दें खुशिय … more →

Tags: inglish, Thought, व्यंग्य, bharat, अनुभूति, चिन्तन, साहित्य, Shayri, media

चाणक्य नीति:विपरीत संस्कार वालों का मेल नहीं हो सकता

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1.मन की शुद्ध भावना से यदि लकड़ी, पत्थर या किसी धातु से बनी मूर्ति की पूजा की जायेगी तो सब में व्याप् … more →

Tags: Blogroll, Vichar, अभिव्यक्ति, अनुभूति, साहित्य, Education, Bloging, Life, Friends

संत कबीर वाणी:सिद्ध से साधू श्रेष्ठ

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब लग नाता जाति का, तब लग भक्ति न होय नाता तोड़े गुरू भजै, भक्त कहावै सोय कविवर कबीर दास जी कहते हैं … more →

Tags: Blogroll, dharm, inglish, Thought, चिन्तन, हिंदी साहित्य, media, Education, Bloging

गुरु-चेला और क्रिकेट 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: गुरु चेले जंगल से निकल कर शहर के मुख्य बाजार में आये, तो देखा सब जगह लोग मूर्तियों की तरह खडे थे. बा … more →

Tags: Blogroll, Vichar, दर्द बांटते चलो, inglish, bharat, media, Education, Bloging, Friends

चाणक्य नीति:परोपकार मधुमक्खी से सीखें 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1.सुकर्म करने वाले कभी भी लोग,भोग, योग और पत्र(रुपया-पैसा) का संचय नहीं करते। इसी कारण उनका सुयश सर् … more →

Tags: Blogroll, hindi, Global Dashboard, bharat, yakeen, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य, vividha

चाणक्य नीति:ज्ञानी को लोभी और राजा को सन्तुष्ट नहीं होना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1. साहसी मनुष्य को अपने पराक्रम का पुरस्कार अवश्य मिलता है। सिंह की गुफा में जाने वाले को संभव है का … more →

Tags: Blogroll, hindi, Global Dashboard, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य, Education, Bloging, Blogger

संत कबीर वाणी:परमार्थ है पीपल समान

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: स्वारथ सूका लाकडा, छाँह बिहूना सूल पीपल परमारथ भजो, सुख सागर को मूल संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं कि … more →

Tags: Vichar, hindi, Global Dashboard, dharm, अभिव्यक्ति, meadia, आचरण, संवेदना, साहित्य

वाह रे बाजार तेरा खेल , कभी पास कभी फेल- हास्य-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब से मोबाइल की बैटरी फ़टने की खबर आई है लोग सहमे हैं जिनके लिये मोबाइल कोई फोन नहीं बल्कि गहने हैं ब … more →

Tags: Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, अभिव्यक्ति, meadia, शायरी, shaayree, shayree, shairee

अपने धर्म पर अटल रहना

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दोस्त हम ऐसा चाहें जो वक्त पर काम आये पर कितना सोचते हैं कि हम दोस्तो के काम आयें ऊपर से लेकर नीचे त … more →

Tags: Blogroll, hindi, Kavita, दृष्टिकोण, Global Dashboard, dharm, कविता, दर्द बांटते चलो, inglish

कोइ बताये सुख क्या होता है

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: चारों और वृक्षों से घिरा खिर्की पर है सुन्दर कांच लगा चिकने पत्थर का फर्श रोशनी से चमकते हुए कमरे सभ … more →

Tags: Vichar, hindi, Kavita, दृष्टिकोण, Global Dashboard, कविता, दर्द बांटते चलो, नज़रिया, विचार


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