शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे ल… more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलात … more →
Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, दर्द, Blame, Friendship, Pain, दीवाना, मीठी, बेवजह
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