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	<title>graved &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/graved/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "graved"</description>
	<pubDate>Sun, 07 Sep 2008 05:00:15 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=911</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 06:24:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा
वह शामो-सह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा<br />
वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<p><font color="#000000">जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों<br />
उसे दिनो-दोपहर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<p><font color="#000000">आस एक बुझी-बुझी है दिल में<br />
मैं हर गली शरर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<p><font color="#000000">कोई खोदे वह यहीं दफ़्न है<br />
'नज़र' जिसे बेख़बर ढूँढ़ता फिरा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह मौसम इक बार ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 17:24:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</guid>
<description><![CDATA[वह मौसम इक बार फिर सजा दे
प्यार करने की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे<br />
दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">अरमान पिघलकर ख़त्म न हो जायें<br />
दिल में साँसें दफ़्न न हो जायें<br />
अपने सीने से लगा ले मुझे<br />
दिल में अपने मुझको जगह दे</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी राहों पर निगाह है मेरी<br />
मेरे दिल में सिर्फ़ चाह है तेरी<br />
मेरे जीवन को अपनी चाहतों में डुबा दे<br />
मेरे सनम जीने की मुझको वजह दे</font></p>
<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे...</font></p>
<p><font color="#000000">सूनी-सूनी आँखें रूख़ी-रूख़ी आँखें<br />
ख़ाली-ख़ाली है सीना ख़ुश्क़ हैं साँसें<br />
जुदा रहके जुदाई में जीना मुमकिन नहीं<br />
मेरे प्यार को अपने प्यार की फ़िज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ३० अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह लम्हा गुज़र जाने दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=825</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 15:53:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=825</guid>
<description><![CDATA[जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो
न ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो<br />
न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो...</font></p>
<p><font color="#000000">वक़्त के क़तरे बहते रहते हैं<br />
हम भी तेरे नशेमन में रहते हैं<br />
आवाज़ देना हमें हम लौट आयेंगे<br />
जायें भी तो और कहाँ जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो<br />
न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो...</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने मुझे अजनबी कह दिया है<br />
इक शीशे के मर्तबाँ में बंद कर दिया है<br />
अब हम साँस कैसे ले पायेंगे<br />
तेरे नाम के साथ दफ़्न हो जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो...</font></p>
<p><font color="#333399">मर्तबाँ का अर्थ jampot या jar होता है।</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १७ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:10:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%86-%e0%a4%a7%e0%a5%81/</guid>
<description><![CDATA[ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
जिस ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है<br />
जिस सिम्त देखता हूँ दिल बदगुमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द को दर्द हो ऐसा होता नहीं<br />
इसीलिए ख़ातिर में यह नौ-जवाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदा ही मेहर से मैं रहा सदियों के फ़ासले पे<br />
आज भी वह ना-मेहरबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ढूँढ़ता हूँ मैं ख़ुद को उस गली में<br />
जिसमें मुझे ज़िन्दगी होने का नुमाया-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">रोशनी में भिगो दिया शबे-महफ़िल को जिसने<br />
तेरी रंगत का शुआ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">एहसासात दफ़्न हैं किसी कब्र में<br />
दर्द दिल का आज कुछ बे-ज़ुबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">खींच लिया जिगर को दाँतों से लब तक<br />
आज महफ़िल में यह कमनुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी दीद से बादशाहत मिली थी मुझे<br />
ज़ख़्म कहता है तेरा साया हुमा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बदनसीबी गर्दिशे-अय्याम है बस<br />
वक़्त यह एक इम्तिहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तमाशा बहुत हुआ तेरे जाने के बाद<br />
जो कुछ भी हुआ ज़ख़्मे-निहाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शज़र बेसमर हैं नकहते-गुल भी नहीं<br />
मौसम यह ज़र्द ख़िज़ाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़ीस्त नवाज़ी गयी सो जी रहे हैं<br />
मगर जीना मुश्किल मरना आसाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">मैं गर तेरा तस्व्वुर करूँ<br />
बूँद-बूँद शबनम का गिरना भी गिरियाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम नहीं गुज़रते इस राह से<br />
मेरी गली का हर पत्थर रेगिस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">वह उजाले जिनसे चौंक गयीं थीं मेरी आँखें<br />
मंज़र वह भी कहकशाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ना पूछ कब से तेरे दीवानों में शामिल हूँ<br />
हाल मेरा भी कुछ-कुछ बियाबाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाल में लिपटी देखा था तुझे<br />
तब से जाना कि चाँद किसी माहलक़ा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम आये घर मेरे आस्ताने तक<br />
कि अब का'बा ही मेरे सँगे-आस्ताँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में हमसा न पायेगा कोई<br />
न होना मेरा उनकी बज़्म में हरमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">हम वस्ल की तमन्ना में मुए जाते हैं<br />
ज़ुज तेरे सभी से वस्ल हिज्राँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">शगून तेरे देखने भर से होता था<br />
आज इन आँखों में हर क़तरा टूटा-टूटा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">बेज़ार है चमन तितली ज़र कैसे पिये<br />
अब कि मौसम भी कुछ बेईमाँ-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हर हमको दिया दवा बता के ख़ुदा ने<br />
ज़ीस्त जो बख़्शी यह भी सौदा-सा है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' बातें हैं बहुत उसके इश्क़ो-ग़म में<br />
जिसका दिल पर निशाँ-सा है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[और इक आह की ख़लिश देती है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%86%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 09:16:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[रूह बहुत बेक़रार&#8217; बहुत बेकल है
इस जिस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रूह बहुत बेक़रार' बहुत बेकल है<br />
इस जिस्म से छुटकारा चाहती है<br />
अगर तुम न मिली मुझको...<br />
यह बेक़रारी' यह बेकली उसी दिन से है<br />
जब तुम्हें पहली बार देखा था...</font></p>
<p><font color="#000000">वह अपलक आँखें<br />
वह थमी हुई साँसें<br />
और वह रवाँ धड़कनों की आवाज़...<br />
सारे एहसास,<br />
तुम्हारे तस्व्वुर से आज भी जाग उठते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारी मोहब्बत मुझे हर दम साँस देती है<br />
और इक आह की ख़लिश देती है<br />
हर लम्हा... हर पल...<br />
मैं कब तक यूँ ही ज़ीस्त की गिरह में फँसा रहूँगा!</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा हाथ थाम लो,<br />
हमसफ़र बनके अपना लो मुझे<br />
या फिर अपने ही पाक़ीज़ा हाथों से...<br />
दफ़्न कर दो मुझे,<br />
एक यही चाह मुझे बरसों से है</font></p>
<p><font color="#000000">एक यही चाह मुझे बरसों से है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब बात करते हुए देखता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/</link>
<pubDate>Mon, 27 Aug 2007 21:31:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/08/27/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/</guid>
<description><![CDATA[तमन्ना बेताब रहती है
और खा़हिश परेशाँ
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तमन्ना बेताब रहती है<br />
और खा़हिश परेशाँ<br />
उदास आईने-<br />
खु़द-ब-खु़द टूटते रहते हैं<br />
राह चलती रहती है<br />
पाँव थक जाते हैं<br />
उम्र कम होती रहती है<br />
साल बढ़ते रहते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रात जागती है आँखों में<br />
दिन वीरान उजाड़ गुज़रता है<br />
उँगलियों में उँगलियों से<br />
और निगाहों को बदन से<br />
जब बात करते हुए देखता हूँ<br />
तेरी याद खा़मोश रह जाती है<br />
कुछ सुलगता रहता है सीने में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तन्हाई का साया न टलता है<br />
दिल की ख़ला न घटती है<br />
अरमान सूखे हुए पत्तों की तरह<br />
ज़मीन पर पडे़ रहते हैं<br />
आँसुओं में भीगते-भीगते<br />
ज़मीन में जज़्ब हो जाते हैं<br />
दफ़्न हो जाते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल के टूटने से<br />
फ़र्क साँस लेने लग जाता है<br />
फ़ज़ा तो नहीं बदलती<br />
लेकिन उसकी छुअन<br />
और एहसास के ज़ख़्म हरे हो जाते हैं<br />
लम्हा-लम्हा मन ग़म में डूबता जाता है<br />
और गीला-गीला जलता रहता है<br />
</span> </p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'</p>
]]></content:encoded>
</item>

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