स्वपन-प्रिया तुम बिन सच कितना खाली सा मेरे मन का जोगी दर्पण तुम चाहो तो तोड़ के बंधन मेरे मन के गीत सजा दो तुम चाहो तो प्रीत निवेदन मेरा इक पल में ठुकरा दो ! टूट न जाए संयम मनका कुछ मनके संयम के गुथना … more →
Where hEaRT Speakspravinkarn wrote 1 month ago: स्वपन-प्रिया तुम बिन सच कितना खाली सा मेरे मन का जोगी दर्पण तुम चाहो तो तोड़ के बंधन मेरे मन के गीत स … more →
pravinkarn wrote 4 months ago: मुह की बात सुने हर कोई मन की बात को जाने कौन| हर तरफ है आवाजो की भीर इसमें खामोसी पहचाने कौन| … more →
pravinkarn wrote 9 months ago: जाने के दिन मैं यही बात कहता जाऊं की जो कुछ मैंने देखा, पाया, उसकी उपमा नहीं थी|| इस प्रकाशमय सरोबर … more →
pravinkarn wrote 9 months ago: कोई दीवाना कहता है, कई पागल समझता है| मगर धरती के बैचैनी को बस बादल समझता है| मैं तुझेसे दूर कैसा हू … more →
pravinkarn wrote 10 months ago: बात करने से फिर बात बढ़ ही जायेगी, यूँही खामोस नहीं, यूँही तो उदास नहीं| कैसे कह सकती हूँ बो दिल के … more →
pravinkarn wrote 10 months ago: दीवारों से लड़ता हूँ ख़ुद से बातें करता हूँ तुम जब से गए हो जाने कितनी मौतें मरता हूँ याद है तुम्हार … more →
pravinkarn wrote 11 months ago: “बिपतियों से रछा कर” – यह मेरी प्राथना नहीं, मैं बिपतियों से भयभीत न होऊं! अपने … more →
pravinkarn wrote 11 months ago: मैं अनेक बास्नाओ को प्राणपन से चाहता हूँ, तुने मुझे उनसे बंचित रख, बचा लिया| तेरी यह निष्ठुर दया मेर … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: सूनी-सूनी ज़िंदगी की राह है, भटकी-भटकी हर नज़र-निगाह है, राह को सँवार दो, निगाह को निखार दो, आदमी हो … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: जीवन पथ हो सुखद या दुखद जीना प्यार से हर दिन एक सा नहीं होता यह बात जान ले जीवन पथ पर डटकर हो तत्पर … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: अगले जनम में भी इतनी अच्छी रहे वो… इतना सा बदल जाये मुझे अपना कहे वो दुनिया का दर्द हो तो आँसू … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: कोई रास्ता , कोई मंजिल तोह नहीं, कोई सागर ,कोई साहिल तोह नहीं, राह में मिले हो चलते चलते, ज़िन्दगी म … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: सासों की सिसकियों को सुना है मैंने, चली है मेरी रूह तेरे जिस्म में रहने, रहने दे तनहा मुझे अंधेरे मे … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: जिस्म से जान को मांगता है कोई, रूह चाहती है उसे कितना यह कहाँ जानता कोई, पल दो पल का तोह नहीं रिश्ता … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: अगर हम अपने दिल को अपना इक चाकर बना लेते तो अपनी ज़िदंगी को और भी बेहतर बना लेते ये काग़ज़ पर बनी चि … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: उनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता, और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता. … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: मस्जिदों-मंदिरों की दुनिया में मुझको पहचानते कहाँ है लोग रोज़ मैं चाँद बन के आता हूँ, दिन में सूरज स … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: ये शिकायत नहीं मेरे दिल की बात है जिसे भूल जाना है वो तुझे क्यों याद है| तेरे जिस्म की चाहत किस ने क … more →
pravinkarn wrote 1 year ago: अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जायेगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा … more →