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Blogs about: Great Poem Colletion

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स्वपन प्रिया - गिरीश बिल्लोरे मुकुल

pravinkarn wrote 1 month ago: स्वपन-प्रिया तुम बिन सच कितना खाली सा मेरे मन का जोगी दर्पण तुम चाहो तो तोड़ के बंधन मेरे मन के गीत स … more →

रैन बसेरा लेखक : अज्ञात

pravinkarn wrote 4 months ago: मुह की बात सुने हर कोई मन की बात को जाने कौन|    हर तरफ है आवाजो की भीर इसमें खामोसी पहचाने कौन|     … more →

जाने की दिन मैं यही बात कहता- लेखन: गुरुदेव रबिन्द्रनाथ ठाकुर

pravinkarn wrote 9 months ago: जाने के दिन मैं यही बात कहता जाऊं की जो कुछ मैंने देखा, पाया, उसकी उपमा नहीं थी|| इस प्रकाशमय सरोबर … more →

हकीकत का हंगामा- लेखक डा. कुमार बिश्वास

pravinkarn wrote 9 months ago: कोई दीवाना कहता है, कई पागल समझता है| मगर धरती के बैचैनी को बस बादल समझता है| मैं तुझेसे दूर कैसा हू … more →

बात बढ़ ही जायेगी लेखक:- तबसुम स्किल1 comment

pravinkarn wrote 10 months ago: बात करने से फिर बात बढ़ ही जायेगी, यूँही खामोस नहीं, यूँही तो उदास नहीं| कैसे कह सकती हूँ बो दिल के … more →

दीवारों से लड़ता हूँ - By Aditya1 comment

pravinkarn wrote 10 months ago: दीवारों से लड़ता हूँ ख़ुद से बातें करता हूँ तुम जब से गए हो जाने कितनी मौतें मरता हूँ याद है तुम्हार … more →

मैं बिपतियों से भयभीत न होऊं! :-लेखक: गुरुदेव श्री रबिन्द्रनाथ ठाकुर 2 comments

pravinkarn wrote 11 months ago: “बिपतियों से रछा कर” – यह मेरी प्राथना नहीं, मैं बिपतियों से भयभीत न होऊं!   अपने … more →

लेखक: गुरुदेव श्री रबिन्द्रनाथ ठाकुर

pravinkarn wrote 11 months ago: मैं अनेक बास्नाओ को प्राणपन से चाहता हूँ, तुने मुझे उनसे बंचित रख, बचा लिया| तेरी यह निष्ठुर दया मेर … more →

आदमी को प्यार दो :- लेखन : अज्ञात

pravinkarn wrote 1 year ago: सूनी-सूनी ज़िंदगी की राह है, भटकी-भटकी हर नज़र-निगाह है, राह को सँवार दो, निगाह को निखार दो, आदमी हो … more →

्््््््््् ‍‍‍‍‍‍जीवन सूत्र ्््््््््््॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰विनोद बिस्सा1 comment

pravinkarn wrote 1 year ago: ‍जीवन पथ हो सुखद या दुखद जीना प्यार से हर दिन एक सा नहीं होता यह बात जान ले जीवन पथ पर डटकर हो तत्पर … more →

अगले जनम में ---- लेखक अनिल

pravinkarn wrote 1 year ago: अगले जनम में भी इतनी अच्छी रहे वो… इतना सा बदल जाये मुझे अपना कहे वो दुनिया का दर्द हो तो आँसू … more →

कोई रास्ता , कोई मंजिल तोह नहीं---लेखक रेखा

pravinkarn wrote 1 year ago: कोई रास्ता , कोई मंजिल तोह नहीं, कोई सागर ,कोई साहिल तोह नहीं, राह में मिले हो चलते चलते, ज़िन्दगी म … more →

फिर मैं --- लेखक रेखा

pravinkarn wrote 1 year ago: सासों की सिसकियों को सुना है मैंने, चली है मेरी रूह तेरे जिस्म में रहने, रहने दे तनहा मुझे अंधेरे मे … more →

कोई - By Rekha

pravinkarn wrote 1 year ago: जिस्म से जान को मांगता है कोई, रूह चाहती है उसे कितना यह कहाँ जानता कोई, पल दो पल का तोह नहीं रिश्ता … more →

by - "कुँअर बेचैन" 1 comment

pravinkarn wrote 1 year ago: अगर हम अपने दिल को अपना इक चाकर बना लेते तो अपनी ज़िदंगी को और भी बेहतर बना लेते ये काग़ज़ पर बनी चि … more →

उनको ये शिकायत है.. ... लेखक : अज्ञात

pravinkarn wrote 1 year ago: उनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता, और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता. … more →

मस्जिदों-मंदिरों की दुनिया में BY- Nanhe.Miyaan@gmail.com

pravinkarn wrote 1 year ago: मस्जिदों-मंदिरों की दुनिया में मुझको पहचानते कहाँ है लोग रोज़ मैं चाँद बन के आता हूँ, दिन में सूरज स … more →

ये शिकायत नहीं मेरे दिल की बात है:- लेखक रेखा 2 comments

pravinkarn wrote 1 year ago: ये शिकायत नहीं मेरे दिल की बात है जिसे भूल जाना है वो तुझे क्यों याद है| तेरे जिस्म की चाहत किस ने क … more →

रचनाकार: बशीर बद्र

pravinkarn wrote 1 year ago: अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जायेगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा … more →


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