है इख्तियार में तेरे तो मोज़दा कर दे, वो शख्स मेरा नही है उसे मेरा कर दे, यह रेक्ज़ार कहीं खत्म ही नही होता, ज़रा सी दूर तो रास्ता हरा भरा कर दे, मैं उसके शोर को देखूं वो मेरा सब्र-ओ-सुकून, मुझे चिराग … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: है इख्तियार में तेरे तो मोज़दा कर दे, वो शख्स मेरा नही है उसे मेरा कर दे, यह रेक्ज़ार कहीं खत्म ही नह … more →