mehhekk wrote 1 year ago: सुबह की पायल खनकते ही,निशा की गोद से उठकर हम अक्सर उनकी गोद में समा जाते है | बिन कहे ही वो कुछ ऐसी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू-गूँज 1.परबतो से टकराई गूँज उठी चारो दिशा में आवाज़ तुम्हारी 2.अख़बार में हर दिन गूंजते है दुनि … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू- नारी 1. ममता से भरी अन्नपूर्णा कहलाती है जन्मदात्रि 2. जिसके बिना सारा जग सुना सु … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू – सवेरा 1. पंछीयो की किलबिल सूरज निकलते ही घरौंदा छोड़े 2. चाँद छुप गया चँदन … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू- प्रकृति 1.बहती हवाए लहराते हरेभरे खेत … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हिन्दी में हाइकू लिखने का हमारा ये पहला प्रयास है| हाइकू – समय 1. रोकना चाहती हूँ … more →