तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 6 months ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना … more →