आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज़ में लिखी मेरी पांच कवितायेँ मिली – चार हिंदी और एक अंग्रेजी | अंग्रेजी कविता “Only I c… more →
Nitin Jalanmequitnever wrote 5 months ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →
mequitnever wrote 8 months ago: असत्याभास एक जवलामुखी है | फुंटता क्यों नहीं | कब तक यह आग की ठंडक मुझे सुजाती रहेगी | एक बार जल जाओ … more →
विनय wrote 11 months ago: कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं … more →
विनय wrote 11 months ago: To see you, I am not me, you see It’s just the first crush or last may be To see you I do nothing to … more →
विनय wrote 1 year ago: I’m deserted with dreams to feel the thirst And trying to find all your best I did each n … more →
विनय wrote 1 year ago: हम सब के सच्चे दोस्त हैं हर दिल की बात समझते हैं उसकी ख़ुशी को हम अपने ख़ुशी के आँसुओं में रखते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर क … more →
विनय wrote 1 year ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा दिल उसका मेरे दि … more →
विनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 1 year ago: राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में है अपना ही मज़ा घुटके मरने का ग़ुमनामी में मुझको गले से लग … more →
विनय wrote 1 year ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले तेरे लबों को मीठी-मीठी हँसी मिले हर दिन तुम्हें बहार का दिन हो कभी न … more →
विनय wrote 2 years ago: You always compared and found me better Like all other, this truth is bitter I know you are envious … more →
विनय wrote 2 years ago: जिससे दुनिया ने हर चीज़ छीनी जिसे अपनी चाहत न मिली जिसके दरवाज़े पर खु़शी आकर लौट गयी जिसकी आँखों से न … more →
विनय wrote 2 years ago: तुमसे चाहत है तुमसे इबादत है मुझे इश्क़ है तुमसे … तुमको देखा तो जाना प्यार क्या है ज़िन्दगी क्य … more →
विनय wrote 2 years ago: क्या पाया और कितना पाया ज़िन्दगी से हमें कोई गिला नहीं सुना है जितना भी देता है खु़दा जीने के लिए मुन … more →