wrote 8 months ago: बड़े दिनों से बॉलीवुड में वो आता-जाता रहता है रोटी चलती है गानों से फ्रीलांस कमाता रहता है. गेस्ट रो … more →
wrote 9 months ago: पदोन्नति- यानि कि ख़ुशी, मतलब एक ऐसा क्षण जब आप अपनी पीठ थपथपा के खुद की थोड़ी सराहना थोड़ी तारीफ और म … more →
wrote 10 months ago: khwab ho aap mera jise hakikat banana hai. bikhare armaano se apna aashiyan basana hai. ek lamha bi … more →
wrote 1 year ago: We need to learn to accept present as it comes our way and be happy. Stop regretting for the past mi … more →
wrote 1 year ago: Is happiness unhappy with you? Are you desperately following it seeing that closer you go far it mov … more →
wrote 1 year ago: क्यों भटक रहे हो इधर उधर ! कुछ वक्त चुरा लो हलचल से दो पल डूबो अपने अंदर , पाना चाहो यदि मनव … more →
wrote 1 year ago: मेरी यादों का गुच्छा तूने फिर से गुमा दिया है फिर बनवाओगे कहाँ तुम वैसा दूजा? मैंने बस इतना पूछा वही … more →
wrote 1 year ago: आया वसंत, छाया वसंत ! झूम उठा है दिग दिगंत, आया वसंत, आया वसंत ! स्वर्ण छटा बिखरी खेतों में सरसों डो … more →
wrote 1 year ago: बीत गए जो दिन भारी थे आयें जो मनभावन हों नवल वसंत हो,गीत नए हों कुसुमित कुंजन कानन हो स्नेह की वर … more →
wrote 1 year ago: Life as it is Just keep going, keep flowing Hitting pebbles here and there Touching the bank up and … more →
wrote 1 year ago: गीत एक फिर गाया मैंने जब जब टीस उठी अंतर में सपनों को समझाया मैंने सहला के जख्मों को अपने फिर से कदम … more →
wrote 1 year ago: रिश्तों की अनबुझ पहेली अजब कहानी और गाथा बहुतेरे अहसास हैं इनमें छुपीं हुई हैं कई व्यथा हम भी … more →
wrote 1 year ago: काल के संदर्भ में पीड़ा का इतिहास क्या कभी पढ़ा है आपने ? मैंने पढ़ने की कोशिश की थी एक बार मंथन करता … more →
wrote 1 year ago: सत्ता पर काबिज लोगों की नैतिकता हो गयी है कुंद भगत सिंह को भुला के अब तो पूजे जाते हैं जयचंद आम लोग … more →
wrote 1 year ago: चाहता हूँ कुछ कहूँ मैं इस विषय या उस विषय पर अर्थवादी व्यवस्था पर आम लोगों की दशा पर जनता की विवशता … more →
wrote 1 year ago: शिष्ट आचरण औ मर्यादा राजनीति के चोर ले गए लोकतंत्र के थे जो प्रहरी जनआशा की डोर ले गए छल की बल की चा … more →
wrote 1 year ago: कच्ची धूप का सिरहाना लिए उस मोड़ की पतली डगर पिपली पेड़ का कोना लिए दूर कहीं गोता लगाये आओं चले हम क … more →
wrote 1 year ago: अर्थव्यवस्था दशा दिशा पर वादे सारे फेल हो गए पेट्रोल के दाम बढ़ाना अब बच्चों के खेल हो गए जनता तो … more →