क्या पाया और कितना पाया ज़िन्दगी से हमें कोई गिला नहीं सुना है जितना भी देता है खु़दा जीने के लिए मुनासिब होता है मुझे उससे कुछ ज़्यादा तो नहीं चाहिए बस इतना दे दे कि तुम्हें खु़श रख सकूँ तुमसे मोहब्बत … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: क्या पाया और कितना पाया ज़िन्दगी से हमें कोई गिला नहीं सुना है जितना भी देता है खु़दा जीने के लिए मुन … more →