हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुकदर मेरा, मैं ही कश्ती हूँ मुझी मे है समंदर मेरा, एक से हो गए मौसम्हो के चेहरे सारे, मेरी आखो से कही खो गया मंजर मेरा, किस से पुछु के कहा गुम हूँ कई बरसों से, हर जगह दुन्द फ… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुकदर मेरा, मैं ही कश्ती हूँ मुझी मे है समंदर मेरा, एक से हो गए मौसम्हो के … more →