सफ़र की क्या मंजिल हो लहरों का क्या साहिल हो माझी का क्या नाव हो सपनो की क्या उड़ान हो देखते थे यह सब ,सपनों में सोचते थे यह सब, दिनों में करते थे यह सब, खेलो में सुनते थे यह सब, झुंडों में किया क्या य… more →
Nitin Jalanmequitnever wrote 4 months ago: सफ़र की क्या मंजिल हो लहरों का क्या साहिल हो माझी का क्या नाव हो सपनो की क्या उड़ान हो देखते थे यह सब … more →
विनय wrote 9 months ago: धीरे-धीरे ग़म सहना, किसी से कुछ न कहना फ़ितरत ऐसी हो गयी, दिन-रात मरके जीना शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़ … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल तोड़ना at first sight झूठा गुस्सा उस पर झूठी fight लड़की है दीवानी लड़का दीवाना अपनी दोनों की जम … more →