रात खामोश है चाँद मदहोश है, थाम लेना मुझे जा रहा होश है, मिलन की दास्ताँ धडकनों की जुबान, गा रही है ज़मीन सुन रहा आसमान, गुनगुनाती हवा दे रही है सदा, सर्द इस रात की गर्म आगोश है, महकती यह फिजा जैसे ते… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: रात खामोश है चाँद मदहोश है, थाम लेना मुझे जा रहा होश है, मिलन की दास्ताँ धडकनों की जुबान, गा रही है … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: गुम सुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है, गम्ज़दा हो गई, ज़िंदगी आ भी जा, रात बैठी है बाहे पसारे, सिस्किया … more →