जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिलाकुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँजो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला। जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखामैं खड़ा हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में,हर एक यहाँ पर एक भुल… more →
Hindi Poetry CollectionJaya wrote 2 years ago: जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिलाकुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँजो किया, कहा, माना उसमें क्या बु … more →
Jaya wrote 2 years ago: अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर, पलक संपुटों में मदिरा भर, तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिय … more →
ssjha wrote 2 years ago: देवों ने था जिसे बनाया, देवों ने था जिसे बजाया, मानव के हाथों में कैसे इसको आज समर्पित कर दूँ? किस क … more →
Jaya wrote 3 years ago: कह रहा जग वासनामय हो रहा उद्गार मेरा! 1 सृष्टि के प्रारम्भ में मैने उषा के गाल चूमे, बाल रवि के भा … more →
Jaya wrote 3 years ago: 1 मैं मधुबाला मधुशाला की, मैं मधुशाला की मधुबाला! मैं मधु-विक्रेता को प्यारी, मधु के धट मुझपर बलिहा … more →