देश में कई लोग अभी भी टाँगे और बैलगाडी चलाते कई जगह हाथ रिक्शा भी खींचे हुए गरीब पसीना बहाते कई लोगों ने उनकी तस्वीर कैनवास पर उतारकर जमाने भर को दिखाई और खूब ख्याति पाई भले ही गरीब को निजात नहीं दिला… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब खामोशी हो चारों तरह तब भी कोई बोलता हैं हम सुनते नही उसकी आवाज हम उसे नहीं देखते पर वह हमें बैठा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: देश में कई लोग अभी भी टाँगे और बैलगाडी चलाते कई जगह हाथ रिक्शा भी खींचे हुए गरीब पसीना बहाते कई लोगो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सास ने बहू से कहा ‘तुम्हें आज मायके जाने की अनुमति पर शाम ढलने से पहले घर लौट आना तेरे ससुर और … more →