तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये, बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये, राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़राह-ए-सितम, होंठ अपने काटकर फ़ौरन जुदा हो जाइये, जी में आता है के उस शोख़-ए-तग़ाफ़ुल केश से, अब ना मिलिये… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है, हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है, बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये, बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये, राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़र … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रोशन जमाल-ए-यार से है अन्जुमन तमाम, दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम, हैरत ग़ुरूर-ए-हुस्न से शोखी स … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब तो उठ सकता नहीं आंखों से बार-ए-इन्तज़ार, किस तरह काटे कोई लैल-ओ-नहार-ए-इन्तज़ार, उन की उल्फ़त का यक़ी … more →