Blogs about: Hasya Kavita

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आंखों से परे का आकर्षण-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: पता नहीं कब कैसे इस देश में यह परंपरा शुरू हुई कि बाहर से जब तक आदमी प्रमाण पत्र नहीं मिले उसे घर मे … more →

Tags: Blogroll, inglish, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, साहित्य, Education, Friends, Blogging

कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में-व्यंग्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अपने कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में उनके पते लिखे हैं बहुत से कागजों पर जो पड़े हैं फाईलों की भीड़ … more →

Tags: हिन्दी, hindi, साहित्य, हास्य कविता, हिन्दी शेर, हिन्दी शायरी, bharatdeep

लड़की छेड़ने के फायदे (हास्य कविता)

nagaarjjun wrote 9 months ago: पहला ये की पता चल जाता है की तुम नोर्मल लड़के हो, फ़िर पैसे खर्च करने की चिंता नही , कड़के ही हो, कभी … more →

Tags: Uncategorized

हास्य व्यंग्य कविता-सजा लेते हैं आंखों में आंसू और चेहरे पर झूठी उदासी-hasya kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कुछ लोग होते हैं पर कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, साहित्य, हिंदी साहित्य, edcation, bharat, web duniya, E-patrika

अपने को बैचेन कर शान्ति ढूँढने जाते-हिन्दी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है त … more →

Tags: अभिव्यक्ति, abhivyakti, Internet, sahity, India, सन्देश, हिन्दू, अनुभूति, साहित्य

इस तरह वह शादी न हो सकी-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मंडप में पहुंचने से पहले ही दूल्हे ने दहेज़ में मोटर साइकल देने की माँग उठाई उसके पिता ने दुल्हन के … more →

Tags: abhivyakti, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, व्यंग्य, शायरी, शेर

आदमी स्वयं भ्रम में फंसा नजर आता-हिन्दी कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: यूं तो वक्त गुजरता चला जाता पर आदमी साथ चलते पलों को ही अपना जीवन समझ पाता गुजरे पल हो जाते विस्मृत … more →

Tags: हिन्दी, editoriyal, Internet, Friends, bharat, India, सन्देश, साहित्य, Deepak bharatdeep

परीक्षा परिणाम-हास्य व्यंग्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उतरा मूंह लेकर फंदेबाज घर आया और बोला- ‘दीपक बापू, बड़ा बुरा दिन आया हाईस्कूल के इम्तहान में मोहल्ले … more →

Tags: hasya vyang, vyangya, writer, Hindi writing, vyangya kavita, Friends, Family, समाज, India

‘‘मैं कुर्सी हूं, किसी की सगी नहीं’’-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कुर्सी पर चाहे लिपिक लिखा हो या महाप्रबंधक बस वह मिलना चाहिए। अपने घर में जिस पर स्वयं बैठ सकें वह ल … more →

Tags: hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar, hindi litreture, inglish

जोरदार और रंगीन तकदीर वह लिखा लाये-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →

Tags: hasya vyang, aritile in hindi, Hindi writing, vyangya kavita, समाज, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web bhaskar

पत्थर का बोझ-हास्य व्यंग्य कवितायेँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →

Tags: क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हास्य व्यंग्य

दिवस बनाता कोई और है, मनाता कोई और है-व्यंग्य hasya vyangya

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: दिवस बनाता कोई और है और मनाता कोई और है। इस देश में हर रोज कोई न कोई दिवस मनाने की चर्चा होती है। अभ … more →

Tags: hasya -vyangya, writer, हिंदी आलेख, हिंदी, Hindi writing, समाज, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web bhaskar

थप्पड़ मारकर सलाम तो किया-तीन क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कुत्ता कहा तो क्या इनाम तो दिया आखिर गोरों ने दिया गुलाम की तरह व्यवहार किया तो क्या थप्पड़ मारकर सल … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, Shayri, hasya vyang, vyangya, writer, hindi article, Hindi writing, hindi kavita

बेरंग हो गया मन, कैसे खेलते होली-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: पृथ्वी के भ्रुण में पानी की जगह हो गयी पोली । पिचकारी में रंग नहीं भरता, कैसे मनायें प्रियतम होली।। … more →

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आजाद होकर भी गुलाम खड़े मालिकों की कृपा के इंतजार में -हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: परदेस में पुजने से ही देश में भगवान बनेंगे कैसा यह उनका भ्रम है। देश के लोगों से मिले मान से क्या गौ … more →

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शराब पीकर पिटा तो हीरो हो जायेगा -व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पड़ौसन ने कहा उस औरत से ‘तुम्हारा आदमी रात को रोज शराब पीकर आता है पर तुम कुछ नहीं कहती वह आराम से … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, bharat, Blogger

बाज़ार में खौफ का अफ़साना-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: <strong>कुछ हकीकत कुछ ख्वाव बन जाता है  यूँ ही अफसाना सुर्खियों में बने रहें अख़बारों की  चर्च … more →

Tags: अभिव्यक्ति, Friends, अनुभूति, शब्द, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya, web bhaskar

चमचा कभी फरिश्ता नहीं बनता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: चांदी के बर्तन में खीर खाने के लिये सोने का चम्मच हाथ में जब मिल जाता है तब चमचा बनने में क्या हर्ज … more →

Tags: hasya vyang, hindi article, Hindi writing, समाज, India, दीपक भारतदीप, web bhaskar, web jagran, web panjab kesri

इंसान को पंख नहीं लगा सकता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जमीन पर आते हुए इंसान ने सर्वशक्तिमान से कहा ‘इस बार इंसान बनाया है इसके लिये शुक्रगुजार हूं पर मुझे … more →

Tags: writing, Global Dashboard, कविता, दृष्टिकोण, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, अनुभूति, हिंदी साहित्य, Internet


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