जरुरतों की शयों का रोज शक्ल बदलना दौलत के पहाड़ पर इंसानों की चाहतों का चढ़ना तरक्की का यह पैमाना नहीं होता। इंसानों के जज़्बातों की उम्र समय के साथ न बदलती हो ख्यालों का चैहरा भी हालातों के साथ नया नज़र… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जरुरतों की शयों का रोज शक्ल बदलना दौलत के पहाड़ पर इंसानों की चाहतों का चढ़ना तरक्की का यह पैमाना नहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नायिका ने बहुत किया अभिनय पर चलचित्रों में सफलता का दौर नहीं चल पाया। नंबर वन की दौड़ में न पहुंचने प … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आम आदमी उस कार्यालय पहुंचा तो सभी के कानों में मोबाइल का तार लगा पाया। सुन रहे थे सभी गाने उसके समझ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अखबार में छपी हर खबर पुरानी नहीं हो जाती है। कहीं धर्म तो कहीं भाषा और जाति के झगड़ों में फंसे इंसानी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आशिक ने माशुका को समझाया ‘‘मोबाईल पर इतनी बात मत करो मैं नहीं उठा सकता खर्चा हर हफ्ते कपड़े भी न मांग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब य … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उन सज्जन ने सच की पहचान करने वाली मशीन की दुकान लगाई पर उसके उद्घाटन के लिये कोई तैयार नहीं हुआ भाई। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात की बूंदें जैसे ही आकाश से जमीन पर आई। अकाल राहत सहायता समिति के सदस्यों के चेहरे पर चिंता घिर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वासनओं पर जितना नियंत्रण करोगे वह बढ़ती जायेंगी। तुम उन्हें भगाने की कोशिश मत करो वह तुम्हें दौड़ायेंग … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: आशिक शिष्य ने अपने इश्क गुरु से कहा ‘‘आदरणीय फिर एक माशुका मेरी जिंदगी में आई पर उसने मेरा इश्क का म … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: साली और भाभी पर जो कोई ख्याली शेर लिखा पढ़ते हुए उसे लोगों का ढेर दिखा। जो बयान किये दर्द जमाने के उस … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: दनदनाता हुआ आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, तुम्हारे हिट होने के मिली गयी चाभी तुम भी बना लो कोई व्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पता नहीं कब कैसे इस देश में यह परंपरा शुरू हुई कि बाहर से जब तक आदमी प्रमाण पत्र नहीं मिले उसे घर मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने कुछ लोग खो गए इस शहर की भीड़ में उनके पते लिखे हैं बहुत से कागजों पर जो पड़े हैं फाईलों की भीड़ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: उतरा मूंह लेकर फंदेबाज घर आया और बोला- ‘दीपक बापू, बड़ा बुरा दिन आया हाईस्कूल के इम्तहान में मोहल्ले … more →