किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी हंसना कभी उसमें बहना कोई फरिश्ते आकर नहीं बताते। ओ किताब हाथ में थमाकर लोगों को बहलाने वालों! शब्द दु… more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर रचनाकर्म कोई आसान काम नहीं है। जो लेखक, कलाकर या कार्टूनिस्ट स्वयं न लिखकर दूसरे को अपनी … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: साली और भाभी पर जो कोई ख्याली शेर लिखा पढ़ते हुए उसे लोगों का ढेर दिखा। जो बयान किये दर्द जमाने के उस … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कविता सजधज तैयार हो गयी। उसका पति कवि बाहर स्कूटर पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। उसे तैयार होता देख स … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वहां महफिल जमी हुई थी। अनेक विद्वान समाज की समस्याओं पर विचार करने के लिये एकत्रित हो गये थे। एक विद … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: उतरा मूंह लेकर फंदेबाज घर आया और बोला- ‘दीपक बापू, बड़ा बुरा दिन आया हाईस्कूल के इम्तहान में मोहल्ले … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: उस दिन उस लेखक मित्र से मेरी मुलाकात हो गयी जो कभी कभी मित्र मंडली में मिल जाता है और अनावश्यक रूप व … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कुत्ता कहा तो क्या इनाम तो दिया आखिर गोरों ने दिया गुलाम की तरह व्यवहार किया तो क्या थप्पड़ मारकर सल … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: चांदी के बर्तन में खीर खाने के लिये सोने का चम्मच हाथ में जब मिल जाता है तब चमचा बनने में क्या हर्ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: क्यों अपना दिल जलाते हो अपना यार इस दुनियां में होते हैं नाटक अपार कभी कहीं कत्ल होगा कहीं कातिल का … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अब चंद्रमा पर धरती पर तमाम देशों के अधिकार की बात शुरु हो गयी है। अखबार में प्रकाशित एक समाचार के अन … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: युद्ध और आंतक पर बहुत सारी सामग्री टीवी चैनलों, समाचार पत्र पत्रिकाओं और अंतर्जाल पर पढ़ने को मिल जा … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सब … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: एक दिन घूमते हुए उसने चाय पिलाई तब वह अच्छा लगा कुछ दिन बाद वह मिला तो उसने पैसे उधार मांगे तब वह बु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत मुश्किल हो गया। अंतर्जाल पर ब्लाग पर ऐसी कठिनाई आयेगी यह कभी नहीं सोचा था। मैं कंप्यूटर पर बैठत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको माना था सरताज वह असलियत में सियार निकल आये भरोसा किया था जिन पर वह मतलब निकालकर होशियार कहलाये … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ‘बिन फेरे, बने बसेरे’ को जब राज्य की वैधानिकता का प्रमाण मिलना प्रस्तावित भर हुआ है तब देश में एक नय … more →