अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक नायिका से कम नहीं समझा करते। फिल्मों में अनेक गीत नायक नायिका को रास्ते पर कार या मोटर साइकिलें चलाते… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहो कुछ भी करो कुछ और। बन जाओगे जमाने के सिरमौर। सभी को सुनने में अच्छा लगे ऐसे शब्द अपने मुख से कहो … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वैसे तो भारतीय संस्कृति और संस्कारों में लोगों को ढेर सारे दोष दिखाई देते हैं पर फिर भी वह उसमें तमा … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये है … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज क … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: वैलंटाईन डे की चर्चा आजकल सुर्खियों में हैं। इसका कुछ लोग विरोध करते हैं तो कुछ नारी स्वतंत्रता के न … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: बरसों पहले कृश्न चंदर का उपन्यास देख ‘एक गधे की आत्मकथा’। पूरा नहीं पढ़ा क्योंकि उसमें गधे का बोलना- … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब फ़िर क्रिकट प्रतियोगिता शुरू होने की तैयारी हो रही है। अखबारों और टीवी पर उसका धूंआधार प्रचार होते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बम के धमाके से कांप गये शहर इमारते कांपने लगी वाहन उड़ गये हवा में बिछ गयी लाशें सड़कों पर पसर गया च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला -सुना है तुमने महाकवि की उपधि स्वयं ही धारण की है क्या इतनी कुंठा आ गयी कि कोई स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता है जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाहिं कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कविता लिखना बहुत सहज है और कोई भी लिख सकता है पर वह पाठक के हृदय में उतर जाये वही कविता उसकी भाषा का … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिको … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज जब हिन्दी ब्लाग दिखाने वाले फोरमों को दौरा किया तो लगा कि जैसे व्यंग्य के लिऐ कहीं और जाने की आवश … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुझे लग रहा है कि जैसे आज से अंतर्जाल पर लिखना शुरू कर रहा हूं। रोमन लिपि में लिखकर हिंदी लिखता तो क … more →