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Blogs about: Hasya Vyangy

Featured Blog

पैसे से गाडी खरीदी है रास्ता नहीं-व्यंग्य चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bapu

कड़वा सच बोलकर क्यों संताप सहो-हिंदी कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहो कुछ भी करो कुछ और। बन जाओगे जमाने के सिरमौर। सभी को सुनने में अच्छा लगे ऐसे शब्द अपने मुख से कहो … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

बाजार में सजा स्वयंवर-हास्य व्यंग्य (bazar men swyanbar-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वैसे तो भारतीय संस्कृति और संस्कारों में लोगों को ढेर सारे दोष दिखाई देते हैं पर फिर भी वह उसमें तमा … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Internet, Bloging, Urdu, Blogging, bharat, web duniya

जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये है … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज क … more →

Tags: अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

एक दिन क्या पूरा महीना है मज़े लेने का - व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: वैलंटाईन डे की चर्चा आजकल सुर्खियों में हैं। इसका कुछ लोग विरोध करते हैं तो कुछ नारी स्वतंत्रता के न … more →

Tags: inglish, हिन्दी, Dashboard, अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Education, Family

क्यों नहीं लिखते आत्मकथा-व्यंग्य 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: बरसों पहले कृश्न चंदर का उपन्यास देख ‘एक गधे की आत्मकथा’। पूरा नहीं पढ़ा क्योंकि उसमें गधे का बोलना- … more →

Tags: अनुभूति, आलेख, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, समाज, हास्य व्यंग्य

क्रिकेट मैच से अधिक अच्छा लगता है ब्लाग/पत्रिका पर लिखना-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब फ़िर क्रिकट प्रतियोगिता शुरू होने की तैयारी हो रही है। अखबारों और टीवी पर उसका धूंआधार प्रचार होते … more →

Tags: Blogroll, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, साहित्य, हिन्दी

फ़रिश्ते अब जमीन पर नहीं आते-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बम के धमाके से कांप गये शहर इमारते कांपने लगी वाहन उड़ गये हवा में बिछ गयी लाशें सड़कों पर पसर गया च … more →

Tags: India, सन्देश, साहित्य, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya, web bhaskar, web jagran, Internet

शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →

Tags: कला, कविता, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य

अपनी कविताओं से दूसरों के ईमेल कूड़ेदान की तरह नहीं सजाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →

Tags: inglish, कविता, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, क्षणिका, Urdu, Education, online jurnalism

दिल में कोई आईना नहीं हैं-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला -सुना है तुमने महाकवि की उपधि स्वयं ही धारण की है क्या इतनी कुंठा आ गयी कि कोई स … more →

Tags: Blogroll, inglish, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, media, Internet, Education, Blogging, समाज

शब्द हमेशा हवाओं में लहराते हैं-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता है जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, media, Internet

रहीम के दोहे:किसी के कहने से बड़े लोग छोटे नहीं हो जाते3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाहिं कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: hindi Personal, Hindi friends, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, India, bharat, hindu dharm, hindi mitra

हास्य कविताएं और गंभीर चिंतन है पाठकों की पसंद-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कविता लिखना बहुत सहज है और कोई भी लिख सकता है पर वह पाठक के हृदय में उतर जाये वही कविता उसकी भाषा का … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, Bloging

इसलिए आज हमने कोई व्यंग्य नहीं लिखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिको … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, हिन्दी, Global Dashboard, अभिव्यक्ति, सूचना, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य

प्यार और नफरत, दोनों पर यकीन नहीं-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग म … more →

Tags: vews, inglish, sher-o-shayree, संपादकीय, अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

हम कहां जा रहे हैं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज जब हिन्दी ब्लाग दिखाने वाले फोरमों को दौरा किया तो लगा कि जैसे व्यंग्य के लिऐ कहीं और जाने की आवश … more →

Tags: Blogroll, hindi, inglish, हिन्दी, Global Dashboard, संपादकीय, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य

अब बंद हो गया हकलाते हुए लिखना

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुझे लग रहा है कि जैसे आज से अंतर्जाल पर लिखना शुरू कर रहा हूं। रोमन लिपि में लिखकर हिंदी लिखता तो क … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, arebic, Bloging


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