नए रगों से हुई फिर यारी, खिल गई हर फुलवारी, भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी। हर ओर खिली हैं उम्मीदें, महकी जीवन बगिया सारी, कल तक नन्हें पौधे थे, फल देने की है अब तैयारी। भूल ले बीते पतझड… more →
लम्हें जिन्दगी केmehhekk wrote 1 year ago: कही कुछ तो पहले तो हमे छूकर गुजरनेवाला हवा का हर झोका मधुर बातें कहता पल पल की खबर देता बावरा सा आगे … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: नए रगों से हुई फिर यारी, खिल गई हर फुलवारी, भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी। हर ओर खिली … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ताश सी ज़िंदगी //1// लगती है हमे कभी कभी ये ज़िंदगी ताश की गडडी सी इंसान सब ताश के पत्ते खेल खेलता व … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना , हर चोट के निशान को सजा कर रखना । उड़ना हवा में खुल कर लेकिन , अपन … more →