वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या होता है तेरे इंतज़ार में परवान इश्क़ में जितना चढ़ता हूँ सीढ़ियाँ हिज्र में उतनी उतरता हूँ सचो-वहम का… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →
विनय wrote 1 year ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा दिल उसका मेरे दि … more →
विनय wrote 1 year ago: जितनी मै उन आँखों में थी उतनी और कहाँ जितना सुरूर उन आँखों में था उतना और कहाँ रोज़ शाम दरवाज़े पे बैठ … more →
विनय wrote 1 year ago: Flowers knew how to bloom I always set out myself From the crowded rooms I spent all day and night I … more →
विनय wrote 1 year ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →
विनय wrote 1 year ago: उसकी आँखों ने मुझे पहचाना तो मगर एक डर से अजनबी-सा डर… चाहता तो रुक कर बात कर लेता मगर मैं - ब … more →