विनय wrote 1 year ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन्ना दबी-सी मेरे दिल में सुलगा गये मैं कितना तन्हा फिर रहा था … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है) तूफ़ान साँसों में चलता है (हाँ चलता है) आँखें ठहर जाती हैं तस्वी … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं ईज़ा1 में पड़ा नदामत2 को तड़पता रहा जैसे शोला बुझती आग में भड़कता रहा मैं कमरे में बैठा खोया रहा … more →
विनय wrote 2 years ago: यह कौन-सा मुक़ाम है? जहाँ आकर सब चेहरे एक-से हो जाते हैं दिल रेत बनकर सीने में गहरा और गहरा धँसने लगत … more →