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यह जिस्म नहीं है4 comments

विनय wrote 1 year ago: यह जिस्म नहीं है, काँच के टुकड़े हैं ज़मीने-वक़्त पर दूर तक बिखरे हैं इन्हें मत छूना हाथों में चुभ जाय … more →

Tags: मेरा गीत, always, इश्क़, कशमकश, काँच, जिस्म, दिये, दिल, दीवार

दिल का जला होता तब रोशनी होती5 comments

विनय wrote 1 year ago: दिल का जला होता तब रोशनी होती मैं तो जला हूँ चश्मे-अश्कबारी का… अब मेरी ख़ाक इक निहाँ दलदल है! … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, Ash, अश्कबारी, इश्क़, ख़ाक, चश्म, जला, दलदल, दिल

शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा

विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →

Tags: रुबाइयाँ, Alone, इश्क़, ख़्याल, चाँद, छुपा, छेड़छाड़, तन्हा, दोस्त

ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ

विनय wrote 1 year ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार की अदा मैं भी जानता हूँ कितना मन मुकद्दर था उसका यह राज़े-निहाँ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, arrow, अदा, आयत, ताबीज़, तीर, निहाँ, मन, मुकद्दर


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