mehhekk wrote 1 year ago: लकीरें माना ये हाथों की लकीरों ने किस्मत के राज़ छुपाए शातिर है वो,ज़िंदगी के पूरे मोहरे तुम्हे नही … more →
mehhekk wrote 1 year ago: माटी का घड़ा मैं तो अब तलक़ सुखी सी माटी थी मैं धूल सी उड़कर आती जाती थी | मैं जिसके भी अंग लग जाती … more →