हिज़ाब-ए-फ़ितना परवर अब उठा लेती तो अच्छा था खुद अपने हुस्न को परदा बना लेती तो अच्छा था तेरी नीची नज़र खुद तेरी इस्मत की मुहाफ़िज़ है तू इस नश्तर की तेजी आजमा लेती तो अच्छा था तेरे माथे का टीका मर्द की कि… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: हिज़ाब-ए-फ़ितना परवर अब उठा लेती तो अच्छा था खुद अपने हुस्न को परदा बना लेती तो अच्छा था तेरी नीची नज़र … more →