त्रिवेणी 1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही खुद को ही बहुत अजनबी महसूस कर रही हूँ 2.हाथियों जितनी बड़ी खुरसियाँ बना कर निरक्षर नेता बैठे उस पर और पूरे देश का झूलुस … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: त्रिवेणी 1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही खुद को ही बहुत अजनबी … more →