दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: रहिमन अति न कीजिए, गहि रहिए निज कानि सैंजन अति फूलै तऊ, डार पात की हानि कविवर रहीम कहते हैं कि कभी भ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आर्तस्तु कुर्यात्स्वस्थ: सन्यथाभाषितमादित:। स: दीर्घस्यापि कालस्य तल्लभेतैव वेतनम।। मनु स्मृति के इस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन राज सराहिए ससिसम सुखद जो होय कहा वापुरी भानु है, तपैं तरैवन खोय कविवर रहीम कहते है की उसी राज् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीकपण्डितो युवतीः यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तयापि फलं तथाप्सरसः हिंदी म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फरजी सह न ह्म सकै गति टेढ़ी तासीर रहिमन सीधे चालसौं, प्यादा होत वजीर कविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: श्रम ही ते सब होत है, जो मन सखी धीर श्रम ते खोदत कूप ज्यों, थल में प्रगटै नीर संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जसी परै सो सहि रहै, कहि रहीम यह देह धरती पर ही परत है, शीत घाम और मेह कविवर रहीम कहते हैं कि इस मानव … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछु न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बंस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाहिं कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जीवनां मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवन न संशयः धर्म रहित प्राणी जीवित … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यस्यं त्रैवाषिक्र भक्तं पर्याप्तं भृत्यवृत्तये अधिकं वापि विद्येत सः सोम पातुमर्हति जिस व्यक्ति के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दैवतान्यभिगच्छेत्तु धार्मिकांश्च द्विजोत्तमान् ईश्वरं चैव रक्षार्थ गुरूदेव च पर्वसु अपनी रक्षा तथा क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यद्ध्यायति यतकुरुते धृतिं बध्नाति यत्र च तद्वाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किञ्चन ऐसा व्यक्ति जो किसी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की गणना भी नहीं की जा सकती है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंसानों की भीड़ में कभी दर्द. कभी प्रेम और हास्य से सुसज्जित शब्दों से रचनाएं बरसाने वाले कवि अकेले … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज फिर घर और बोला ”दीपक बापू यह भी भला क्या किताबों की नक़ल छापते हो कभी लिखते किसी क … more →